k 9 and m 777 guns in indian army
k 9 and m 777 guns in indian army

नई दिल्ली। भारतीय सेना युद्धकाल में दुश्मन को करारा जवाब देने के लिए और ताकतवर हो गई है। शुक्रवार को सेना के बेड़े में एम-777 अल्ट्रालाइट होवित्जर तोप और के-9 वज्र तोप शामिल हो गई हैं। ये दोनों तोपें मारक क्षमता के लिहाज से बहुत जबरदस्त मानी जाती हैं। इससे भारतीय सेना युद्ध के मैदान में दुश्मन को और ज्यादा ताकत के साथ जवाब देने में सक्षम हो गई है।

महाराष्ट्र के देवलाली में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और थल सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने इन तोपों को आधिकारिक रूप से सेना में शामिल कर लिया है। ये दोनों तोपें हमारी सेना के तरकश में ऐसा तीर हैं जो जरूरत पड़ने पर सटीक निशाना लगाकर दुश्मन के इलाके में भयंकर तबाही मचा सकती हैं।

इस तरह शुक्रवार का दिन सामरिक ​दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण रहा है। अब सेना को न केवल अत्याधुनिक तकनीक से लैस तोपें मिली हैं, बल्कि मौजूदा चुनौतियों के मद्देनजर उसकी ताकत भी बढ़ गई है। सेना को ये तोपें मिलना इसलिए भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि चीन और पाकिस्तान लगातार सामरिक चुनौतियां पैदा करते रहते हैं। बेहद ऊंचाई और पहाड़ी इलाकों में ये तोपें दुश्मन के छक्के छुड़ा सकती हैं।

इस संबंध में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक ट्वीट कर जानकारी दी कि शुक्रवार को हमारी सेना एम-777 अल्ट्रालाइट होवित्जर तोप और के-9 वज्र से लैस हो जाएगी। एम-777 ए2 अल्ट्रा लाइट होवित्जर तोप को पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में तैनात कर दुश्मन पर जोरदार प्रहार किया जा सकता है। रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि के-9 वज्र को 4,366 करोड़ रुपए की लागत से सेना में शामिल किया गया है। कुल सौ में से 10 तोपों की आपूर्ति इस महीने होगी। नवंबर 2020 तक यह कार्य पूरा होगा।

ये हैं के-9 वज्र की खूबियां
के-9 वज्र तोप युद्ध में गोलों की जोरदार बौछार कर दुश्मन को धराशायी कर सकती है। यह 30 सेकंड में तीन गोले और तीन मिनट में 15 गोले तक दाग सकती है, जिससे दुश्मन को संभलने का मौका नहीं मिल पाएगा। यह 28-38 किमी के इलाके तक प्रहार कर सकती है। सेना को 40 के-9 वज्र तोपें नवंबर 2019 में और 50 तोपें नवंबर 2020 में मिलेंगी। यह भारतीय निजी क्षेत्र द्वारा निर्मित पहली तोप है, जो सेना में शामिल की गई है। इसकी पहली रेजिमेंट जुलाई 2019 तक पूर्ण होने की संभावना है।

एम-777 की बेमिसाल ताकत
भारतीय सेना में शामिल हुई एम-777 होवित्जर तोप लाने-ले जाने में आसान लेकिन निशाने में ​बेमिसाल है। यह 30 किमी तक वार करने में सक्षम है। युद्धकाल या किसी अन्य परिस्थिति में इसे विमान या हेलिकॉप्टर के जरिए भी ले जाया जा सकता है। सेना इसकी सात रेजिमेंट बनाएगी। इन तोपों की आपूर्ति अगस्त 2019 से शुरू होगी और 24 महीनों में प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इसकी पहली रेजिमेंट अक्टूबर 2019 तक पूर्ण होगी। 52 कैलिबर वाली एम-777 तोप की क्षमता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अमेरिका, कनाडा और आॅस्ट्रेलिया की सेनाएं इनका इस्तेमाल करती रही हैं।

बोफोर्स का प्रहार नहीं भूला पाक
भारतीय सेना ने 1999 में कारगिल युद्ध में बोफोर्स तोपों का इस्तेमाल कर पाकिस्तानी फौज को खदेड़ा था। उस समय अत्यधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर भी सेना ने ये तोपें तैनात कीं और भारी गोलाबारी कर पाकिस्तान के नापाक इरादों पर पानी फेर दिया था। पाकिस्तान के फौजी जनरल और रक्षा विशेषज्ञ आज तक उस गोलाबारी का जिक्र करते हैं। ऐसे में कश्मीर और पहाड़ी एवं दुर्गम स्थानों के लिए भारतीय सेना के पास अत्याधुनिक तोपें होनी जरूरी हैं।

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