भगवान बाहुबली महामस्तकाभिषेक की शुरुआत आज से

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श्रवणबेलगोला। आठ हजार की आबादीवाले श्रवणबेलगोला में भगवान बाहुबली का 88वां महामस्तकाभिषेक का बुधवार से शुरू होने जा रहा है। इस मौके की तैयारी पूरे जोरों पर है। गौरतलब है कि जैन परंपरा के अनुसार भगवान बाहुबली का महामस्तकाभिषेक 12 साल में एक बार होता है। गोमटेश्र्वर में बाहुबली की 58.8 फीट की मूर्ति है और स्थल जैन तीर्थस्थल के रूप में दुनिया भर में विख्यात है। कल से शुरू होनेवाले इस महोत्सव के लिए बड़ी संख्या में जैन मुनि पूजा की तैयारी में लगे हुए हैं। दरअसल, 1

7 फरवरी को महामस्तकाभिषेक शुरू होगा और 26 फरवरी तक यह महोत्सव चलेगा। लेकिन तीर्थयात्रियों का आवागमन इस तीर्थस्थल में अगले कुछ महीनों तक बना रहेगा। इससे पहले पिछला महामस्तकाभिषेक समारोह 2006 में संपन्न हुआ था।

श्रवणबेलगोला मठ के प्रमुख स्वातिश्री चारूकीर्ति भट्टराक स्वामीजी के अनुसार यह प्राचीन जैन परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। इस आयोजन का उद्‌घाटन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद करेंगे। इसके अस्थायी व अस्थायी ढांचे के लिए राज्य सरकार 300 करोड़ रु. से ज्यादा खर्च कर रही है। सैंकड़ों वर्षों से जैन संस्कृति का साक्ष्य बना यह शहर में अगले दो सप्ताह तक लगभग चालीस लाख तीर्थयात्री और पर्यटकों से भरा रहेगा।

बेंगलूरु में मंगलवार को पहुंचे राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री सिद्दरामैया, राज्यपाल वजुभाई वाला, मंत्री केजे जॉर्ज। ज्ञातव्य है कि राष्ट्रपति बुधवार को श्रवणबेलगोला में आयोजित महामस्तिकाभिषेक कार्यक्रम का उद्‌घाटन करेंगे।

उल्लेखनीय है कि श्रवणबेलगोला विंध्यगिरि और चंद्रगिरि की पहाड़ियों के बीच है। भगवान बाहुबली की प्रस्तर मूर्ति 2300 साल पुरानी है। इसका महत्व जैन धरोहर के रूप में दुनिया भर में फैले जैनियों के लिए तो है ही, इस महोत्सव का हिस्सा बनने के लिए दुनिया के कोने-कोने से पर्यटक और श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। गौरतलब है कि जैन जीवन शैली में त्याग और अहिंसा के महत्व और इसके संदेश को सदियों से श्रवणबेलगोला शहर ने सहेज कर रखा हुआ है। भगवान बाहुबली 24वें तीर्थंकरों में से पहले तीर्थंकर ऋषवदेव के पुत्र थे। जन्म, त्याग, ज्ञान और मोक्ष जैसे असाधारण गुणों के साथ जीवन के हरेक स्तर को जीने के लिए इन्हें पूजा जाता है।

गंग राजवंश के चामुंडराय ने 981 ईस्वी में एक चट्टान तराश कर बाहुबली की मूर्ति तैयार करवाई थी, तब से 12 साल के अंतर में लगातार ऐतिहासिक महत्व का यह महोत्सव मनाया जाता है। 12 वर्षों की इस श्रृंखला में कल से 88वां महामस्तकाभिषेक संपन्न होने जा रहा है। माना जाता है कि मूर्ति स्थापना के बाद चामुंडा राय ने ही भगवान बहुबली का पहला महामस्तकाभिषेक किया था। हालांकि इस संबंध में 1398 ईस्वीं के बाद के ही रिकॉर्ड उपलब्ध हैं। मूर्ति की स्थापना के बाद से कुछ गूढ़ शब्दों को छोड़ कर समारोह के बारे में बहुत ही कम जानकारियां उपलब्ध हैं। वर्ष1398 से पुराने संदर्भों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि 1398 से पहले एक पंडिताचार्य ने सात महामस्तकाभिषेक संपन्न किए थे। वर्ष 1659 से वाडियार राजवंश के शासकों ने महामस्तकाभिषेक के आयोजनों में जी खोल कर दान दिया।

बहरहाल, इस महोत्सव के लिए बुनियादी सुविधाओं से परिपूर्ण लगभग 12 शहर तैयार किए जा रहे हैं। इसके लिए अनेक किसानों की जमीन अस्थायी रूप से अधिग्रहित की गयी है और बदले में किसानों को 2-3 फसल के नुकसान का मुआवजा दिया गया है। इन शहरों में 19,500 जैन मुनि और अनुयायी, 6,500 सरकारी व पुलिस अधिकारी समेत मीडियाकर्मी रह सकेंगे। महोत्सव के मद्देनजर विंध्यगिरि की पहाड़ी की चोटी पर एक जर्मन कंपनी इस्पात का मचान का निर्माण कर रही है, जिसमें एक बार में लगभग पांच हजार लोग समा सकते हैं्‌। इस विंध्यगिरि पर भगवान की विशालकाय प्रस्तर मूर्ति विद्यमान है। जो लोग पहाड़ चढ़ने में असमर्थ है, उनके लिए तीन एलीवेटरों की भी सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है।

पहले दिन 108 पवित्र कलशों का उपयोग किया जाएगा, बाकी प्रत्येक दिन 1008 कलश का उपयोग होगा। उपायुक्त रोहिणी सिंधुरी ने श्रवणबेलगोला और उसके आसपास इलाके में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह प्रतिबंध 1 फरवरी से 28 फरवरी तक लागू रहेगा। गौरतलब है कि महामस्तकाभिषेक में हिस्सा लने के लिए पिछले सप्ताह श्रवणबेलगोला में मध्यप्रदेश के पुष्पगिरि मठ के एक विशिष्ठ जैन मुनि आचार्य श्री 108 पुष्पदंत सागर महाराज पधार चुके हैं। उनके साथ उनके दस शिष्य भी हैं। श्रवणबेलगोला मठ के श्री चारूकीर्ति भट्टराक स्वामी ने उनका स्वागत किया। श्रवणबेलगोला पहुंच रहे सारे पुजारी और उनके शिष्य यात्री नगर में रहेंगे। इस नगर को महोत्सव के मद्देनजर जैन परंपरा के अनुसार तैयार किया गया है।

– सीएनआर विजय कुमार (वार्ता)

देश भर से पहुंचे रहे हैं कलाकार

श्रवणबेलगोला। महामस्तकाभिषेक महोत्सव में लाखों श्रद्धालुओं का मनोरंजन करने देश भर से कलाकार श्रवणबेलगोला पहुंचेंगे। भगवान बाहुबली का महामस्तकाभिषेक महोत्सव बुधवार से शुरू होने जा रहा है। मशहूर कलाकार-गायक कुणाल गांजावाला, विजय प्रकाश, खुशबू जैन, पंडित उदय कुमार मल्लिक, मीर मुख्तियार अली, नरसिम्हालु वदावती, मैसूरु मंजूनाथ, पंडित विश्र्वमोहन भट्ट, टी एम कृष्णा, राजेश कृष्णन, हेमंत, शमिता मलंड, विद्वान आरके पद्मनाभ और गुरु किरण कल के कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। 7 से 26 फरवरी तक प्रतिदिन शाम साढ़े पांच बजे से रात साढ़े दस बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। राज्य सांस्कृतिक विभाग ने हासन के प्रतिभावान अनेक कलाकारों को इसमें भाग लेने का मौका दिया है। 12 साल में एक बार आयोजित होनेवाले इस महोत्सव के उद्‌घाटन समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आने वाले हैं। बुधवार की शाम को ही मुंबई के रुपेश जैन और गायक विजय प्रकाश भी सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेंगे। इस मौके पर हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत, कर्नाटक संगीत, भरतनाट्यम, चित्रकारी, लोक संगीत, लोक नृत्य, सुगम संगीत और वाद्य संगीत कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। महोत्सव स्पीड पेंटर विलास नायक का कार्यक्रम भी होना है। राज्य सरकार ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए दो करोड़ रु. की राशि मंजूर की है।

जैन मठ की ओर से किफायती पैकेज की घोषणा

बेलगावी। भगवान बाहुबली गोमेटेश्र्वरा के महामस्तकाभिषेक के लिए श्रवणबेलगोला में लगभग 40 लाख श्रद्धालु और पर्यटक भाग लेने वाले हैं। इस महोत्सव के मद्देनजर जैन मठ की ओर से गरीब और मध्यवर्ग के श्रद्धालुओं-तीर्थयात्रियों के लिए दो दिवसीय किफायती पैकेज की घोषणा की गयी है।

गौरतलब है कि हर 12 साल के अंतर में होने वाले इस महामस्तकाभिषेक महोत्सव का हिस्सा बनने के लिए महाराष्ट्र-कर्नाटक से भीड़ संख्या में श्रद्धालु श्रावणबेलागोला आते हैं। बुधवार को शुरू होनेवाले इस महोत्सव के लिए जैन मठ ने जैन तीर्थयात्रियों के लिए 2100 रु. के किफायती यात्रा और प्रवास सुविधा की घोषणा की है। महामस्तकाभिषेक के मुख्य आयोजन में भाग लेना काफी खर्चीला है। इसीलिए मठ की ओर से यात्रा खर्च में सब्सिडी दी जा रही है। इस किफायती दर की तीर्थयात्रा में यात्रा के साथ तमाम खर्चों को भी शामिल किया गया है। आने-जाने के किराए से लेकर रहने-खाने समेत तमाम खर्च को इसमें शामिल किया गया है। मठ के श्री लक्ष्मीसेन भट्टाराक स्वामी ने कहा कि यात्रा को नि:शुल्क भी किया जा सकता है, लेकिन चूंकि इस महा आयोजन के लिए इतनी बड़ी लागत को देखते हुए यह संभव नहीं होगा, इसीलिए तीर्थयात्रियों के लिए किफायती खर्च पर तीर्थ की सुविधा मुहैया करायी गयी है। उन्होंने बताया कि इस मौके पर कोल्हापुऱ सांगली, बेलागावी, रायबर्ग, गोकाक, हुब्बल्ली-धारवाड़, गदग से लगभग पांच हजार श्रद्धालु के पहुंचने की उम्मीद है। स्वामी लक्ष्मीसेन ने बताया कि इन सभी श्रद्धालुओं के रहने का इंतजाम मठ करेगा। इतने बड़े महोत्सव के मद्देनजर इस क्षेत्र के तीर्थयात्री भी नि:शुल्क तीर्थयात्रियों के लिए अपने साथ बड़े पैमाने पर खाद्य सामग्री लेकर आएंगे।

स्काउट एवं गाइड भी देंगे सेवाएं

श्रवणबेलगोला। शहर में बुधवार से शुरु होने वाले गोम्मटेश्वर बाहुबली महामस्तकाभिषेक कार्यक्रम में आने वाले श्रद्धालुओं को स्काउट एंड गाइड प्रशिक्षु विभिन्न विषयों की जानकारी देंगे तथा सहयोग करेंगे। मंगलवार को शहर में स्काउट एवं गाइडों का राज्यस्तरीय स्वयंसेवक शिविर का आयोजन किया गया जिसका उद्‌घाटन स्वास्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामीजी ने किया। इस मौके पर स्वयंसेवक प्रमुख पीजीआर सिंधिया, जिला उपायुक्त रोहिनी सिंदूरी, विधायक सीएन बालकृष्णा आदि उपस्थित थे। ज्ञातव्य है कि यह स्वयंसेवी स्काउट एवं गाइड इस महामहोत्सव में वरिष्ठ व बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को अनेक तरह से सहायता करेंगे। इस मेले में 250 से अधिक स्काउट एवं गाइड प्रशिक्षुक अपनी सेवाएं देंगे।

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