इस्लाम अपनाने के लिए बहकाई गई लड़की वापस बनी हिन्दू

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  • धर्मांतरण के लिए अपनाए गए हथकंडों का खोला राज

कोच्चि। केरल के कासरगोड की रहने वाली तथा हिन्दू धर्म को छोड़कर इस्लाम अपनाने वाली आथिरा नामक युवती ने वापस हिन्दू धर्म अपना लिया है। इस युवती ने अब इस बात का खुलासा किया है कि उसे इस्लाम धर्म अपनाने के लिए किस प्रकार बहलाया फुसलाया गया और किन-किन हथकंडों का इस्तेमाल किया गया। यह लड़की गत 10 जुलाई को अपने घर से अस्पताल जाने के बहाने निकली थी और बाद में अपने घरवालों को 15 पृष्ठों का एक पत्र लिखकर इस बात की जानकारी दी थी कि उसने इस्लाम धर्म अपना लिया है। इससे पूर्व लड़की ने अपने मामा को फोन कर यह बताया था कि वह शांति की खोज में जा रही है।

अथिरा के माता-पिता ने इसके बाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर अपनी बेटी को वापस दिलाने का अनुरोध किया था। उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद अथिरा को उसके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया था। हालांकि न्यायालय ने उसके माता-पिता के समक्ष इस बात की शर्त भी रखी थी कि उसपर वापस हिन्दू धर्म में लौटने के लिए किसी प्रकार का दबाव नहीं बनाया जाए। अदालत ने उसके माता-पिता से यह भी कहा था कि अथिरा को इस्लाम की पढाई करने से भी नहीं रोका जाए। अब अथिरा ने वापस हिन्दू धर्म अपना लिया है और यह कहा है कि उसे अपनी गलती का एहसास हो गया है।

अथिरा ने हिन्दू धर्म में वापस लौटने के बाद बताया कि उसके कुछ मुस्लिम दोस्तों ने उसे इस्लाम अपनाने के लिए उकसाया और बहलाया फुसलाया। उसने एक चैनल से बातचीत में कहा कि उसके मुस्लिम दोस्त अक्सर उसे हिन्दू धर्म के खिलाफ बातें बताते थे और हिन्दू धर्म की कमियों की ओर उसका ध्यान आकृष्ट करने की कोशिश करते थे। उसके मुस्लिम दोस्तों ने उसे यहां तक कहा था कि हिन्दू धर्म में पत्थर की पूजा की जाती है और उसे भगवान मानकर उससे मदद की उम्मीद की जाती है।

अथिरा ने खुलासा किया है कि उसे इस्लाम के प्रति झुकाव पैदा करने के लिए जाकिर नाइक जैसे विवादास्पद धर्म गुरुओं का भाषण सुनाया जाता था। इस प्रकार के भाषणों में अक्सर यह कहा जाता था कि सिर्फ इस्लाम ही दुनिया का श्रेष्ठ धर्म है और बाकी धर्म सही नहीं है। इसके साथ ही उसे इस्लाम धर्म में नर्क की अवधाराणाओं को बताने वाली एक पुस्तक भी दी गई थी। इस किताब को पढने के बाद उसे ऐसा लगने लगा कि उसके साथ भी वही सब कुछ घटित होगा जिसका उल्लेख उस किताब में किया गया है।

अथिरा के अनुसार जब उसने घर छोड़ा उसके बाद अनीसा और सिराज नामक उसके दो दोस्तों के माध्यम से सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया और पाप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया नामक संगठन से परिचय हुआ। सिराज पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया का सदस्य भी था। जब न्यायालय द्वारा उसे उसके माता-पिता के पास जाने का निर्देश दिया गया था तो इन्हीं दोनों संगठनों ने उसे घर जाने से पहले टीवी चैनल को साक्षात्कार देने के लिए और पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने की सलाह दी थी।

अथिरा ने वापस अपने धर्म को अपनाने के बाद अन्य लोगों से अपील की है कि वह अपने धर्म को सही ढंग से समझने की कोशिश करें। बकौल अथिरा किसी भी व्यक्ति में अपने धर्म को छोड़कर किसी अन्य धर्म के प्रति आकर्षण पैदा होने का मुख्य कारण उसके द्वारा अपने धर्म के सही ढंग से नहीं समझना है। उसका कहना है कि लोगों को अपने धर्म के बारे में पढने और समझने के बाद ही धर्म बदलने का कदम उठाना चाहिए और किसी के बातों से गुमराह होकर इस प्रकार का कदम नहीं उठाना चाहिए।

2 COMMENTS

  1. इस गूगल पर भी तब मुझे अपनत्व का एहसास हुआ
    जब ‘दक्षिण भारत राष्ट्रमत’ आ इस पर मेरे पास हुआ।

    नित साइकिल पर आने वाला अब हवा में उड़ आता है
    कागज पर छपने से पहले ही ताजी खबर सुनाता है।

    जो पन्ने पलटता था अबतक वो अंगुली से है टटोल रहा
    अब फोन के पर्दे पर आकर जो दक्षिण भारत बोल रहा।

    यूं लगता जैसे अब है सारी दुनिया मेरे साथ में
    है जिस फोन में ‘दक्षिण भारत’ वह है मेरे हाथ में।

    हंसराज मुणोत

    • प्रिय श्री हंसराजजी,
      आपकी आत्मीयता के हम कायल हैं।
      आपके स्नेह ने भाव विभोर कर दिया।
      इतना ही कहना चाहते हैं…

      जो समय के साथ चले,
      वह आगे बढता जाता है।
      पाठक जिसके हों आप जैसे,
      वो ख्याति जरूर ही पाता है।

      सुबह की चाय के लिए जिन्हें,
      ‘दक्षिण भारत’ रोज जगाता।
      ऑनलाइन भी अब यह उनके,
      संग संग कदम बढाता।

      मन चाहे जब हाथों में लेकर
      या मोबाइल पर पढना।
      हे मानस के ‘राज हंस’ तुम
      स्नेह बनाए रखना।

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