herbal medicines
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बेंगलूरु। भारतीय वैज्ञानिकों ने देसी पद्धति से और बिना दुष्प्रभाव के उच्च रक्तचाप का इलाज आसानी से करने की स्थिति में पहुंच जाने का दावा किया है। अनुसंधानकर्ताओं ने इलाज की सिद्धा पद्धति के जरिये प्रचलित भारतीय मसालों और सफेद कमल की पंखुड़ियों की एक निश्चित मात्रा से उच्च रक्त चाप पर नियंत्रण पाया है। चेन्नई के विशेषज्ञों ने चूहों पर इसका सफल प्रयोग किया है और अब इसका प्रयोग जानवरों तथा सिद्धा दवाओं के माध्यम से क्लिनिकल ट्रॉयल की तैयारी की जा रही है।

रामचन्द्र विश्वविद्यालय की विज्ञान पत्रिका-प्रायोगिक जीवविज्ञान और दवा में प्रकाशित एक शोध में कहा गया है कि इलाइची, अदरख, स्याह जीरा, पीपड़, सतपुष्प, अदि मधुरस और सफेद कमल के फूल की पंखुड़ियों से बनी दवा ‘वेतामलाई चूर्ण’ से प्रयोगशाला में चूहों के उच्च रक्तचाप पर काबू पाया गया है।

देश के एक करोड़ 20 लाख से अधिक लोग उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं। उच्च रक्तचाप लम्बे समय के बाद महत्वपूर्ण अंगों को नष्ट कर देता है और अंत में इससे मौत हो जाती है। जीन, मोटापा अधिक नमक का सेवन और मदिरापान से यह बीमारी फैलती है। शहरों में रहने वाले चार लोगों में से एक में आनुवांशिक रूप से उच्च रक्तचाप होने की प्रवृत्ति रहती है।

ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले 15 प्रतिशत लोगों में यह समस्या है। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. एस तानिकाचलम इस अनुसंधान का नेतृत्वकर रहे हैं। आम तौर पर उच्च रक्तचाप का इलाज एलोपैथी पद्धति से किया जाता है। इसकी दवाएं महंगी होती हैं और कई बार इलाज का दुष्प्रभाव भी होता है। इसके बाद उन्होंने प्राचीन दस्तावेजों का अध्ययन करने का निर्णय लिया।

वैज्ञानिकों ने पहले सिद्धा चूर्ण का प्रयोग चूहों पर किया और इसे प्रभावशाली पाया। इस चूर्ण का प्रयोग 63 दिनों तक किया गया और पाया कि उच्च रक्त चाप कम हो गया है। इस अध्ययन का हिस्सा रहे विशेष विशेषज्ञ सी श्रवण बाबू ने कहा है कि इस दवा के प्रयोग से जीन, उकाक और रक्त नलिका में अच्छा बदलाव आया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, मनुष्य को यह दवा देने के पूर्व कई प्रकार के अन्य प्रयोग किए जाएंगे। अध्ययन के दौरान चिकित्सकों ने चूहों को तीन समूहों में विभाजित किया। पहले समूह के चूहों के पेट को काट कर बंद कर दिया गया। दूसरे एवं तीसरे चरण के चूहों के एक गुर्दा में रक्त की आपूर्ति को आंशिक रूप से बाधित किया गया।

शल्यक्रिया के दो माह बाद पाया गया कि अधिकांश चूहे उच्च रक्तचाप से पीड़ित थे और उनके रक्त नलिकाओं, गुर्दे और हृदय में कई समस्याएं उत्पन्न हो गई थीं। चूहों में रक्त चाप की माप के लिए चिकित्सकों ने विशेष प्रकार के यत्रों का उपयोग किया। इन चूहों के एक किलोग्राम वजन पर 400 ग्राम वेंतामलाई चूर्ण को 63 दिनों तक दिया गया और पाया गया कि उनका रक्तचाप सामान्य था।

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