election commission bangladesh
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ढाका। भारत में भले ही इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर सवाल उठाए जाते रहे हों लेकिन हमारा पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश इस बार संसदीय चुनावों में ईवीएम के इस्तेमाल का फैसला कर चुका है। वहां 23 दिसंबर को आम चुनाव होंगे। चुनाव आयोग ने ऐलान किया है कि इस बार सीमित स्तर पर ईवीएम का भी इस्तेमाल होगा।

बांग्लादेश में सरकार और विपक्षी पार्टियों के बीच चुनाव की तारीखों को लेकर खींचतान हो रही है। अब चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि देश में नए साल से पहले चुनाव कराए जाएंगे। बांग्लादेश के मुख्य चुनाव आयुक्त नूर-उल-हुदा ने कहा है कि पूरे मुल्क में 11वां आम चुनाव 23 दिसंबर को होगा। उन्होंने चुनाव की तारीख के लिए चार आयुक्तों के साथ बैठक की। इसके बाद ऐलान कर दिया गया।

हालांकि वहां विपक्ष इसके विरोध में खड़ा हो गया है। नेशनल यूनिटी फ्रंट (एनयूएफ) मांग कर रहा है कि चुनाव की तारीखें टाल दी जाएं। जबकि प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग का कहना है कि चुनाव आयोग को इन्हीं ति​थियों में चुनाव कराने के निर्णय को बरकरार रखना चाहिए।

श्रम और संसाधनों की बचत
इन संसदीय चुनावों में ईवीएम भी एक मुद्दा है। चुनाव आयोग ने कहा है कि ईवीएम से मतदान प्रक्रिया की गुणवत्ता में सुधार आएगा। इसके अलावा श्रम और संसाधनों की भी बचत होगी। हालांकि इन आम चुनावों में ईवीएम का आंशिक इस्तेमाल होगा। शेष स्थानों पर पूर्व की भांति मतपत्र ही काम में लिए जाएंगे। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इससे पहले स्थानीय सरकार के निर्वाचन में ईवीएम का आंशिक इस्तेमाल हो चुका है। अब संसदीय चुनावों में यह प्रयोग कर इसके नतीजे देखे जाएंगे।

ढाका ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट कहती है कि चुनाव आयोग कम से कम 100 सीटों पर ईवीएम का इस्तेमाल करेगा। इसके लिए एक लाख 50 हजार मशीनें काम में ली जाएंगी। इस तरह बांग्लादेश के नागरिक भी अपने मुल्क की सरकार चुनने के लिए ठप्पा लगाने के बजाय बटन दबाएंगे। इन संसदीय चुनावों में 10.42 करोड़ मतदाता करीब 40,199 मतदान केंद्रों पर उम्मीदवारों का भविष्य तय करेंगे।

यूं बदले ​समीकरण
दूसरी ओर विपक्ष ने प्रदर्शन की धमकी दी है। उसने आशंका जताई कि इन चुनावों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उल्लंघन हो सकता है। चूंकि वहां बीएनपी प्रमुख और विपक्ष की दिग्गज नेता खालिदा ज़िया भ्रष्टाचार के दो मामलों में सजा काट रही हैं। उनके बेटे तारिक को भी ग्रेनेड कांड में उम्रकैद हो चुकी है। ऐसे में प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग को कोई पार्टी बड़ी चुनौती देती नजर नहीं आती।

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