isi and terrorism
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ढाका। बांग्लादेश में आम चुनावों से पहले आईएसआई की बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। देश में 23 दिसंबर को चुनाव होने हैं और पाकिस्तान की आईएसआई वहां आतंकियों और कुछ गैर-सरकारी संगठनों का इस्तेमाल दहशतगर्दी को बढ़ावा देने में कर रही है। इसी के मद्देनजर शेख हसीना सरकार ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए एक संगठन के कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है जो पाकिस्तान से धन लेकर यहां आतंकवाद फैला रहे थे। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आतंकी गतिविधियों के लिए धन के लेनदेन के आरोप में स्मॉल काइंडनेस बांग्लादेश के आठ कर्मचारी गिरफ्तार किए गए हैं। इनका संबंध अंसार-अल-इस्लाम से बताया जा रहा है।

जांच अधिकारियों के मुताबिक, बांग्लादेश की सेना का एक पूर्व मेजर सैयद जियाउल हक बाद में आतंकवादी बन गया था। उसने पाकिस्तान के सहयोग से बांग्लादेश में आतंकवाद की जड़ें जमाने में अहम भूमिका निभाई थी। एक मशहूर प्रकाशक की हत्या मामले से भी वह जुड़ा रहा है। जानकारी के अनुसार, आईएसआई इन संगठनों को आर्थिक मदद कर आतंकवाद फैलाने के लिए उकसा रही थी। वर्ष 1971 की लड़ाई में शिकस्त मिलने के बाद पाकिस्तान अब यहां आतंकवाद के रास्ते अपनी पैठ बढ़ाने में जुटा है। इसके लिए आईएसआई बांग्लादेश में आतंकी संगठनों को धन मुहैया कराकर यहां भी दहशत को परवान चढ़ाने का काम कर रही है।

शेख हसीना सरकार ने इसके खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए व्यापक कार्रवाई शुरू की है। भारत के लिए यह कार्रवाई इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि वह हमारा पड़ोसी देश है और उससे रिश्ते भी अच्छे हैं। बांग्लादेश पुलिस ने एक बीमा कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की है। एजेंसियां ऐसे और लोगों पर नजर रख रही हैं जिन पर उन्हें संदेह है।

बता दें कि पिछले कुछ वर्षों में बांग्लादेश में कट्टरपंथी समूहों की बढ़ती तादाद के पीछे आईएसआई की अहम भूमिका रही है। वह इन्हें आर्थिक मदद देकर विध्वंसक गतिविधियों के लिए उकसाती है। जांच में पाया गया कि धर्मनिरपेक्ष ब्लॉगरों की हत्या में भी ऐसे तत्वों का हाथ रहा है। दरअसल पाकिस्तान वर्ष 1971 की हार का बदला लेना चाहता है। इसके लिए उसकी एजेंसियां बांग्लादेश के अलावा भारत में भी देशविरोधी तत्वों को बढ़ावा देती हैं।

बांग्लादेश इस मामले में सतर्कता बरत रहा है। उसके सुरक्षाबल कई आतंकियों को ढेर कर चुके हैं। वर्ष 2016 में ढाका कैफे हमले के बाद सुरक्षा पर कई सवाल उठे थे। उसमें आईएसआई की भूमिका भी बताई जा रही थी। उसके बाद सुरक्षाबलों ने सख्ती बरती और अब तक 100 से ज्यादा आतंकियों को मारा जा चुका है। एजेंसियों ने 1,500 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार कर उनकी जांच शुरू कर दी। इससे आतंक की कई कड़ियां खुलकर सामने आ रही हैं।

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