yoga for good health
yoga for good health

बेंगलूरु। यदि आप बढ़ते वजन से परेशान हैं और जल्दी से अपना वजन कम करना चाहते हैं तो योग आपकी हेल्प कर सकता है। कुछ योग नियमित रूप से करने पर वजन बहुत जल्दी कम हो जाता है। कुछ ऐसे ही योग के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें करने के बाद आप अपने वजन में फर्क महसूस कर सकते हैं।

भस्त्रिका प्राणायाम
भस्त्रिका का मतलब है धौंकनी। इस प्राणायाम में सांस की गति धौंकनी की तरह हो जाती है। यानी श्वास की प्रक्रिया को जल्दी-जल्दी करना ही भस्त्रिका प्राणायाम कहलाता है

विधि
पद्मासन या फिर सुखासन में बैठ जाएं। कमर, गर्दन, पीठ एवं री़ढ की हड्डी को सीधा रखते हुए शरीर को बिल्कुल स्थिर रखें। इसके बाद बिना शरीर को हिलाए दोनों नासिका छिद्रों से आवाज करते हुए श्वास भरें। फिर आवाज करते हुए ही श्वास को बाहर छोड़ें। अब तेज गति से आवाज लेते हुए सांस भरें और बाहर निकालें। यही क्रिया भस्त्रिका प्राणायाम कहलाती है। हमारे दोनों हाथ घुटने पर ज्ञान मुद्रा में रहेंगे और आंखें बंद रहेंगी। ध्यान रहे, श्वास लेते और छोड़ते वक्त हमारी लय ना टूटे।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम
अनुलोम का अर्थ होता है सीधा और विलोम का अर्थ है उल्टा। यहां पर सीधा का अर्थ है नासिका या नाक का दाहिना छिद्र और उल्टा का अर्थ है-नाक का बायां छिद्र। अर्थात् अनुलोम-विलोम प्राणायाम में नाक के दाएं छिद्र से सांस खींचते हैं, तो बायीं नाक के छिद्र से सांस बाहर निकालते हैं। इसी तरह यदि नाक के बाएं छिद्र से सांस खींचते हैं, तो नाक के दाहिने छिद्र से सांस को बाहर निकालते हैं। अनुलोम-विलोम प्राणायाम को कुछ योगीगण नाड़ी शोधक प्राणायाम भी कहते हैं। उनके अनुसार इसके नियमित अभ्यास से शरीर की समस्त नाड़ियों का शोधन होता है यानी वे स्वच्छ व निरोग बनी रहती हैं। इस प्राणायाम के अभ्यासी को वृद्धावस्था में भी गठिया, जोड़ों का दर्द व सूजन आदि शिकायतें नहीं होतीं।

भ्रामरी प्राणायाम
भ्रामरी प्राणायाम करने के लिए किसी भी सुखद आसन जैसे पद्मासन, सहज आसन या सुखासन में बैठ जाएं। लंबी और गहरी सांस लेते हुए सांस को शांत रखें। उसके बाद दोनों हाथों के अंगूठे से दोनों कानों को बंद कर लें। अपनी अनामिका उंगली को माथे पर और मध्यमा-तर्जनी अंगुली को आंखों पर रखें। इस आसन को करते समय अपनी रीढ़ की हड्डी बिलकुल सीधी रखें। लंबी और गहरी सांस लेते हुए फेफड़े पूरी तरह भर लें। कुछ देर के लिए सांस रोकें। इसके बाद भवरे जैसी गुंजन करते हुए लंबी सांस को बाहर निकालें। ऐसा करते समय आवाज लगातार आनी चाहिए। फिर कुछ क्षण के लिए सांस को बाहर ही रोकें। इस आसन को सुबह और शाम पांच बार नियम से करना चाहिये और फिर धीरे-धीरे इसकी संख्या ब़ढाते जाइए। इसको करने से आपको तनाव, थकान से मुक्ति मिलेगी।

सूर्य नमस्कार
सूर्य नमस्कार योगासनों में सर्वश्रेष्ठ है। यह अकेला अभ्यास ही साधक को सम्पूर्ण योग व्यायाम का लाभ पहुंचाने में समर्थ है। इसके अभ्यास से साधक का शरीर निरोग और स्वस्थ होकर तेजस्वी हो जाता है।

अर्ध मत्स्येन्द्रासन
अर्ध मत्स्येन्द्रासन को करने से बहुत से रोग दूर होते हैं तथा इससे कुण्डलिनी शक्ति का जागरण होता है। यह आसन हलासन, भुजंगासन या पूर्ण मत्स्येन्द्रासन करने में कठिनाई हो तो अर्द्ध मत्स्येन्द्रासन करना चाहिए।

LEAVE A REPLY