नई दिल्ली। प्लास्टिक का हम सबके जीवन में कितना अधिक महत्त्व हो चुका है, इस बारे में शायद ज्यादा बताने की ़जरूरत नहीं है। घटते वन क्षेत्र को बढाने, प्रदूषण की रोकथाम एवं पे़डों के संरक्षण संबंधी कानूनों के अस्तित्व में आने के बाद रो़जमर्रा की ि़जन्दगी से जु़डे कार्यकलापों से लेकर फर्नीचर निर्माण एवं अन्तरिक्ष टेक्नोलोजी कार्यक्रम में भी प्लास्टिक की उपयोगिता दिन प्रतिदिन ब़ढती ही जा रही है। अपने टिकाऊपन,लागत में सस्ती और मजबूती के गुणों के कारण कारों एवं हवाई जहाज तक के निर्माण में इसका उपयोग हाल के वर्षों में भारी मात्रा में होने लगा है। लागत कम होने के कारण इनसे तैयार प्रोडक्ट्स आम आदमी की पहुँच में भी हैं्। ऐसे में यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि प्लास्टिक ने मानव जीवन को अधिक आरामदायक और सुखमय बनाने में अहम भूमिका निभाई है।्रध्य्यडट्ट·र्ैं ट्टष्ठ·अर्ैंह्ध्ह्ज्र्‍ ·र्ैंय् द्बब्žप् ज्यादातर लोगों को यह जानकारी नहीं होगी कि प्लास्टिक इंजीनियरिंग भी आज इंजीनियरिंग की एक महत्वपूर्ण शाखा के रूप में स्थापित हो चुका है। किसी भी आकृति में मोल्ड होने की अद्भुत क्षमता और कम लागत में आसानी से उपलब्धता के कारण ही प्रत्येक उद्योग में प्लास्टिक ने अपनी जगह बना ली है। प्लास्टिक के ब़ढते इस्तेमाल की वजह से ही ऐसे ट्रेंड लोगों की ब़डे पैमाने पर ़जरूरत महसूस की जाने लगी जो प्लास्टिक डिजाइनिंग, मोल्डिंग तथा इससे तरह-तरह के उत्पाद तैयार करने में पारंगत हों्। सही मायने में प्लास्टिक इंजीनियरिंग की विधा का इसी क्रम में विकास हुआ है। इस प्रोफेशन में ट्रेंड लोगों का काम प्लास्टिक से संबंधित नए अनुसँधान करना और इसकी उपयोगिता में इन्जीनियिंग के सिद्धांतों का इस्तेमाल करने पर आधारित होता है। ट्रेनिंग- चार वर्षीय बी टेक(प्लास्टिक इंजीनियरिंग) के अलावा कई तरह के तीन वर्षीय डिप्लोमा कोर्सेस भी सरकारी पोलिटेक्निक और अन्य प्राइवेट संस्थाओं द्वारा संचालित किये जाते हैं्। इन कोर्सेस में प्रायः व्यावहारिक पहलुओं पर ज्यादा जोर दिया जाता है ताकि युवाओं के लिए प्लास्टिक मोल्डिंग से जु़डे काम करने वाली फै्ट्रिरयों और कंपनियों में काम करने में कोई दिक्कत न हो। इंटर्नशिप करने के मौके कोर्स के दौरान मिलते हैं्। इसका उद्देश्य होता है इंडस्ट्री के काम के वातावरण से ये परिचित हो सकें और वहां पर होने वाली परेशानियों के बारे में समय रहते समुचित प्रशिक्षण दिया जा सके। एप्टीच्यूड -किताबी प़ढाई से भागने वाले और टेक्नीकल लाइन में दिलचस्पी रखने वालों के लिए यह करिअर निर्माण का अच्छा विकल्प हो सकता है। इसमें कई अन्य प्रोफेशन की तुलना में ज्यादा समय प़ढाई और ट्रेनिंग पर लगाने की ़जरूरत भी नहीं है। क्रिएटिव माइंड और कुछ नया कर दिखाने वाले जोशीले युवाओं के लिए अपनी क्षमताओं को साबित करने की दृष्टि से भी यह कार्यक्षेत्र अच्छा कहा जा सकता है। ध्यान रखें कि मेहनत से भागने वालों के लिए इस क्षेत्र में सफल होने की ज्यादा गुंजाइश नहीं है।्रध्य्यडट्ट·र्ैं ंैंठ्ठणडट्टुर्‍ झ्यद्य्प्रद्भदेश में १८० से अधिक प्लास्टिक प्रोसेसिंग मशीनरी के निर्माता हैं और २५००० से अधिक प्लास्टिक पर आधारित प्रोसेसिंग एवं उत्पादन कार्य करने वाली ईकाइयां कार्यरत हैं्। गैर पंजीकृत प्लास्टिक मोल्डिंग यूनिट्स को इसमें शामिल नहीं है। देश के प्रत्येक हिस्से में ऐसी फै्ट्रिरयों की उपस्थिति देखी जा सकती है। विकसित देशों की तुलना में अभी भी हमारी प्रति व्यक्ति प्लास्टिक की खपत काफी कम है। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में इस मांग में ब़ढोतरी होने की पूरी संभावनाएं है। ऐसे में न सिर्फ और उत्पादक इकाइयां स्थापित होंगी बल्कि इस हुनर में ट्रेंड लोगों के लिए जॉब्स के अवसरों में भी वृद्धि होगी।रो़जगार-डिप्लोमाधारकों को इस क्षेत्र में अमूमन शुरूआती स्तर की जॉब मिलती है लेकिन समय और अनुभव के साथ वेतन और पदोन्नतियां होती रहती हैं्। नए प्रोडक्ट डिजायन और कम लागत में अच्छी क्वालिटी के मोल्डेड प्रोडक्ट्स तैयार करने की धुन के पक्के लोगों के लिए नामी और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में रो़जगार पाने के अवसर कभी कम नहीं होते हैं्। कई सरकारी संस्थानों में भी इस तरह के ट्रेंड लोगों के लिए जॉब्स के अवसर उपलब्ध है। इस विषय में यदि उच्च शिक्षा हासिल करते हैं तो शिक्षण तथा आर एंड डी के क्षेत्र में आगे ब़ढने के मौके मिल सकते हैं्। इतना ही नहीं थो़डे बहुत निवेश से ब़डी एवं नामी कम्पनियों के लिए छोटे पार्ट्स या प्लास्टिक के पुर्जे बनाने का काम भी स्वरोजगार के रूप में शुरू किया जा सकता है और अन्य लोगों के लिए रो़जगार के नए अवसरों का सृजन भी कर सकते हैं्।

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