बेंगलूरु/दक्षिण भारतमनुष्य जीवन, आर्यदेश, उत्तमकुल और जैन धर्म की प्राप्ति जीव के लिए अत्यंत दुर्लभ है। परम पुण्योदय से ही इन सभी की प्राप्ति होती है। यही नहीं, महान पुण्योदय से ही उपधान तप की आराधना करने का अवसर भी मिलता है। यह कहा आचार्यश्री मुक्तिसागरसूरीश्वरजी ने। वे यहां होसूर रो़ड स्थित सुराणा नगर के पार्श्वसुशील धाम तीर्थ में उपद्यान तपाराधना के दौरान उपस्थित आराधकों व श्रद्धालुओं को अपना उद्बोधन दे रहे थे। एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए आचार्यश्री ने कहा कि बगैर पुण्योदय के उपद्यान तप करना कतई संभव नहीं है। उपद्यान तप समिति के सुरेश बंदामूथा ने बताया कि बेंगलूरु, चेन्नई, हैदराबाद, विजयवा़डा, मैसूरु, मंड्या, वेल्लूर, टूमकुर, हुब्बल्ली व मुंबई के करीब १५० आराधक उपद्यान तप कर रहे हैं। शुक्रवार की नीवी एकासना का लाभ अमीयाबाई दीपचंद पालगोता चौहान परिवार वालों ने लिया।

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