दक्षिण भारत न्यूज नेटवर्कवेल्लूर। पुष्पगिरि तीर्थ के प्रणेता दिगंबर संत आचार्यश्री पुष्पदंतसागरजी, मुनिश्री प्रमुखसागरजी व परागसागरजी का चेन्नई की ओर पदविहार जारी है। सोमवार को वेल्लूर पहुंचे संतों ने यहां के स्वर्णमंदिर के दर्शन किए। इस अवसर पर अरिहंतगिरि के भट्टारक स्वस्ति श्री धवलकीर्ति स्वामीजी तथा वेल्लूर मठ के महंत उपस्थित थे। आचार्र्यश्री ने अपने उद्बोधन में यहां कहा कि भारतीय संस्कृति की अविच्छिन्न धारा में संतों की साधना, लेखन, चिंतन और अभिव्यक्ति से अभीभूत होती रही है। उन्होंने कहा कि सम्राटयूगीन सभ्यता में संत-आस्था, गुरु-आशीष व मार्गदर्शन से रामायण तथा महाभारतकालीन राज्यों के फलने-फूलने के प्रमाण अधिक मिलते हैं। आचार्यश्री ने कहा कि संत शक्ति के संचारगृह की तरह होते हैं। संत जहां जीते हैं, उस अतुल गहराई से संसार के विषयों पर दिशा-बोध देते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में पाश्चात्य संस्कृति की आंधी भारतीय प्रकाश को बुझाने पर तुली हुई है, ऐसे में देश को इस अंधकार से बचान के लिए हमारे समाज को कृत संकल्पित होना होगा।

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