muni ji pravachan
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बेंगलूरु/दक्षिण भारत। यहां गोडवाड़ भवन में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ चिकपेट शाखा के तत्वावधान में आध्यात्मिक चातुर्मास 2018 के तहत अहिंसा समवशरण के प्रांगण से बुधवार को उपाध्यायश्री रवींद्रमुनिजी ने पर्युषण पर्व के सातवें दिन ‘कर्म निर्जरा का हेतु, तप’ विषयक प्रवचन में बुधवार को कहा कि जहां तक तप और तपस्या की बात है शास्त्रों में तपस्याओं का ही वर्णन है। आगमों में भी कहा गया है कि अनेक भवों पापभवों की निर्जरा करने में तपस्या सहायक है। तपस्या कर्मों को इस प्रकार खपा देती है जैसे सूखे ईधन की जलने पर हो जाती है।

मुनिश्री ने तप की अन्य प्रकार की परिभाषा देते हुए कहा, इच्छाओं पर नियंत्रण करने को भी तप कहा गया है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार उपवास में अनेक चीजों का त्याग करना पड़ता है इस प्रकार तप की आराधना में चातुर्मास काल, सावन, भादों माह, पर्युषण पर्व तपस्या का विशेष समय होता है। मुनिश्री ने 6 प्रकार के आंतरिक व 6 प्रकार के बाह्य यानी 12 प्रकार के तपों का विस्तार से उल्लेख करते हुए कहा कि जो तप की आराधना करता है वह अपने जीवन का शुद्धिकरण करते हुए तप के क्षेत्र में आगे बढ़ता ही है।

तपस्या के क्षेत्र में आ रही गिरावट का भी जिक्र करते हुए उपाध्यायश्री ने कहा कि अनेक प्रकार की बीमारियों से ग्रस्त लोगों से चाहकर भी तपस्या नहीं हो पाती ऐसे लोगों को लघु तप करने की सीख देते हुए उन्होंने कहा कि किसी न किसी प्रकार के त्याग पच्चखाण के साथ तपस्या करनी ही चाहिए। इससे पूर्व अंतगढ सूत्र में उज्जवल परंपरा के स्वर्णिम इतिहास का वर्णन एवं साधना की अनुमोदना करते हुए सलाहकारश्री रमणीकमुनिजी ने मूल पाठ का वाचन किया।

उन्होंने कहा कि जिन जिन कमियों पाप, कषायों की चौकड़ी, इंद्रियों के आकर्षण या मोह के फैलाव आदि की वजह से संसार की हम लोग जो यात्रा कर रहे हैं ऐसे में इतनी महान आत्माओं के वर्णन सुनने के बाद भी संसार के आकर्षण से मुक्त नहीं होना विडंबना है। अनुमोदना-आलोचना करके सम्यक्त्व की उपार्जना करने की प्रेरणा देते हुए मुनिश्री ने कहा कि संसार के सभी प्रपंचों को छो़डकर दिल को धर्म से जो़ड कर पर्युषण पर्व के इन महान 8 दिनों में अपूर्व लाभ लेना चाहिए।

उन्होंने कहा कि बुढ़ापा और रोग व्यक्ति की गुदगुदाहट मिटा देते हैं। इससे पूर्व श्री रचितमुनिजी ने स्तवन गीत प्रस्तुत किया। धर्म सभा का संचालन गौतमचंद धारीवाल ने किया। उन्होंने बताया कि बुधवार को जाप के लाभार्थी जयचन्द बिलवाडिया, विमल बम्ब व रचना मेरतवाल का रवीन्द्रमुनिजी ने सम्मान किया। श्री पारसमुनि जी ने मांगलिक प्रदान की।

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