paan
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नई दिल्ली। पुरखों से सुना है कि बादाम खाने से अक्ल बढ़ती है। अमिताभ बच्चन ने अस्सी के दशक से करीब दो साल पहले डॉन फिल्म में बताया कि बनारस वाला पान खाने से बंद अक्ल का भी ताला खुल जाता है। लिहाजा हमने उनकी बात मान ली। फिर जब शाहरुख खान भी यही बात कहते दिखे तो इसे नकारने की कहीं से गुंजायश ही नहीं रही।

पर अब तक यह सवाल भी कायम था कि अमिताभ और शाहरुख खुद कहां का पान खाते हैं! इसका जवाब देती हैं ​कुछ तस्वीरें जो दिल्ली की एक दुकान में लगी हैं। इसमें आप इन दोनों के अलावा बॉलीवुड, कारोबार और सियासत के कई दिग्गज चेहरों की पान खाते हुए तस्वीरें देख सकते हैं। दुकान के मालिक यश टेकवानी कहते हैं कि पान बेचना कोई मामूली काम नहीं है। यह एक कला है और पनवाड़ी का रुतबा किसी विशेषज्ञ से कम नहीं होता।

यश टेकवानी कई वर्षों से ग्रेटर कैलाश में पान की दुकान चला रहे हैं। इंटरनेट पर उनकी दुकान के कई किस्से मशहूर हैं। मोहल्ले के ताऊ से लेकर विदेश तक इनके पान बड़े नाम कमा चुके हैं। बॉलीवुड के तीनों खान इनके पानों का लुत्फ उठा चुके हैं। कई कारोबारी इनके पान के मुरीद हैं। पान का स्वाद कई जुबानों पर चढ़ा तो तो दुकान के गल्ले में नोट भी बरसने लगे। आज यश टेकवानी का पूरा परिवार इसी कारोबार में जुड़ा है और उन्हें इस पर गर्व है।

टेकवानी कहते हैं कि सौंफ-चटनी मिला देने ही से पान नहीं बनता। इसके लिए हुनर चाहिए और हुनर के लिए धैर्य, जो उन्होंने अपने पुरखों से सीखा। यहां अक्षय कुमार, श्रीदेवी, लता मंगेशकर और भी न जाने कितने मालूम-नामालूम लोग पान खा चुके हैं। कुछेक की तस्वीरें यहां शान से लगाई गई हैं

yash tekwani
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टेकवानी कहते हैं कि उनके पास रोज चर्चित नामों की ओर से आॅर्डर आते हैं। इनमें कई बड़े कारोबारी भी हैं। दुकान चलते—चलते नौ चेन तक फैल गई है। इनमें से दो चेन थाईलैंड में हैं। बहुत जल्द लंदन में भी दुकान खोलने का इरादा है। हालांकि यहां तक पहुंचना आसान नहीं था। वर्ष 1965 में इस दुकान की स्थापना उनके पिता भगवानदास ने की थी। वे​ विभाजन के बाद भारत आए थे।

शुरुआत में उन्होंने कुली का काम भी किया। फिर पकौड़े बेचे और बाद में पान की दुकान खोल ली। वे खुद के नुस्खे ईजाद करते रहते थे। बाद में ये लोगों की जुबां पर चढ़े तो मशहूर हो गए। इसलिए पढ़े-लिखे युवा वर्ग को यह बात गांठ बांध लेनी चाहिए कि पान हो या पकौड़ा, किसी काम को हल्के में न लें। कोई काम छोटा नहीं होता। अगर मेहनत और लगन से किया जाए तो उससे भी आप बुलंदियों तक पहुंच सकते हैं। वैसे अक्ल का ताला खोलने वाली यह बात भी तो पुरखों ने ही कही थी!

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