jain muni tarun sagar ji
jain muni tarun sagar ji

नई दिल्ली। जैन मुनि तरुण सागरजी हमारे बीच नहीं रहे। श्रद्धालुओं में उनके कड़वे प्रवचन बहुत विख्यात रहे हैं। उनमें तरुण सागरजी का गहन चिंतन, मनन और अध्ययन समाया है। उनके प्रवचनों ने कई लोगों को राह दिखाई और आगे भी दिखाते रहेंगे। मुनिजी के प्रवचनों की पुस्तकें, वीडियो आदि इंटरनेट पर उपलब्ध हैं। पढ़िए इन्हीं में से कुछ ‘कड़वे प्रवचन’:

1. मुनिजी ने कहा था कि बच्चों के झगड़ों में बड़ों और सास-बहू के झगड़ों में बाप-बेटे को कभी नहीं पड़ना चाहिए। .. यही शांति का सूत्र है।

2. मीठे के साथ नमकीन जरूरी है तो सुख के साथ दुख होना भी लाजमी है। मुनिजी ने कहा था कि दुख बड़े काम की चीज है। ज़िंदगी में यदि दुख न हो तो कोई प्रभु को याद ही न करे।

3. दुनिया में रहते हुए दो चीजों को कभी नहीं भूलना चाहिए- परमात्मा और मौत। वहीं भूलने वाली दो बातें भी हैं। इन्हें तुरंत भूल जाओ- तुमने किसी का भला किया और किसी ने तुम्हारे साथ अगर कभी बुरा किया।

4. पसीना बहाना सीखिए। बिना पसीना बहाए जो हासिल होता है, वह पाप की कमाई है। ब्याज मत खाइए। ब्याज पाप की कमाई है। आज हमे प्याज खाना तो छोड़ दिया लेकिन ब्याज खाना जारी है।

5. ज़िंदगी में मां, महात्मा और परमात्मा से बढ़कर और कुछ भी नहीं है। जीवन में तीन आशीर्वाद जरूरी हैं- बचपन में मां का, जवानी में महात्मा का और बुढ़ापे में परमात्मा का।

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