नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पास पाकिस्तानी कार्रवाई का सशस्त्र बल उचित जवाब दे रहे हैं और सीमा पर घुसपैठ को प्रभावी तरीके से रोक रहे हैं। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) अधिनियम (अफ्सपा) पर फिलहाल पुनर्विचार नहीं किया जा रहा है जो जम्मू-कश्मीर और उग्रवाद प्रभावित पूर्वोत्तर के कई राज्यों में लागू है। अधिनियम में सुरक्षा बलों को विशेषाधिकार हासिल हैं और ग़डब़डी वाले इलाकों में अभियान चलाने में छूट हासिल है। जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के विभिन्न तबके लंबे समय से इसे वापस लेने की मांग करते रहे हैं। मालदीव में स्थिति के बारे में पूछने पर सीतारमण ने कहा, हम इस पर गौर कर रहे हैं। नियंत्रण रेखा पर स्थिति के बारे में उन्होंने कहा, हम घुसपैठ पर काफी हद तक नियंत्रण पा सके हैं। हम पाकिस्तानी कार्रवाई का उचित जवाब दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बल घुसपैठियों का भारतीय जमीन पर कदम रखने से पहले ही नियंत्रण रेखा पर खात्मा कर रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि यह भी कहना ठीक नहीं है कि कोई भी घुसपैठ नहीं कर पा रहा है। नियंत्रण रेखा पिछले वर्ष से संवेदनशील रहा है। आधिकारिक आंक़डों के मुताबिक २०१७ में पाकिस्तानी सैनिकों की तरफ से संघर्ष विराम उल्लंघन की ८६० घटनाएं हुई हैं जबकि उसके पहले वर्ष में २२१ घटनाएं हुई थीं। सुंजवान हमले के बाद सीतारमण ने कहा था कि पाकिस्तान को उसके दु:साहस की कीमत चुकानी प़डेगी।

३६ राफेल जेट के सौदे में भ्रष्टाचार के आरोपों को खारिज करते हुए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि घोटाला प्रभावित बाफोर्स तोप सौदे और ल़डाकू विमानों की खरीद के बीच तुलना नहीं की जा सकती है। सीतारमण से जब संवाददाताओं ने पूछा कि क्या राफेल समझौते का हश्र बोफोर्स जैसा होगा तो उन्होंने कहा, इसकी (राफेल सौदा) तुलना भी बोफोर्स से मत कीजिए। यहां कोई घोटाला नहीं हुआ है। कांग्रेस राफेल मुद्दे पर सरकार पर हमलावर रही है और उसका दावा है कि उसके शासनकाल में जो सौदा हुआ था वह मोदी सरकार द्वारा ३६ राफेल जेट की खरीद से ज्यादा सस्ता था। मोदी सरकार ने फ्रांस से ५८ हजार करो़ड रुपए में ३६ राफेल जेट का सौदा किया है।रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश में ही बने हल्के ल़डाकू विमान तेजस की उपेक्षा किए जाने संबंधी सभी रिपोर्टों को खारिज करते हुए कहा कि न तो सरकार और न ही वायु सेना किसी ने भी तेजस को नजरअंदाज नहीं किया है बल्कि सरकार तेजस मार्क-२ का भी बेसब्री से इंतजार कर रही है और चाहती है कि इनकी आपूर्ति बहुत तेज गति से होनी चाहिए। रक्षा मंत्री ने कहा कि हिन्दुस्तान एरोनोटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को तेजस की ब़डी संख्या में तेजी से आपूर्ति करने के लिए हर संभव प्रयास करने चाहिए क्योंकि देश की जरूरत पूरी होने के बाद सरकार इसके निर्यात की संभावनाओं पर भी काम कर रही है। श्रीमती सीतारमण ने यहां पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा, सरकार ने तेजस को नजरअंदाज या खारिज नहीं किया है और न ही इस परियोजना को ठंडे बस्ते में डाला है। तेजस वायु सेना का हिस्सा है और रहेगा। उन्होंने कहा कि तेजस के साथ केवल एक ही समस्या है कि एक साल में औसतन ६ तेजस की आपूर्ति से काम नहीं चलेगा।

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