plant a tree
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वॉशिंगटन/दक्षिण भारत। पर्यावरण को लेकर नासा की एक रिपोर्ट पढ़कर आपको यकीनन खुशी होगी। इसके मुताबिक, भारत और चीन पौधे लगाने के मामले में सबसे आगे हैं। प्रसिद्ध अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसी ने कहा कि हमारी धरती पिछले 20 वर्षों की तुलना में कहीं ज्यादा हरी-भरी हो गई है। नासा ने यह रिपोर्ट अपने उपग्रहों के आंकड़ों और विश्लेषण के आधार पर तैयार की है, जो पर्यावरण संबंधी मामलों में भारत और चीन के लिए उत्साहवर्धक कही जा सकती है।

भारत और चीन दुनिया के सबसे ज्यादा आबादी वाले देश हैं। यहां पर्यावरण पर आबादी का काफी दबाव होता है। इस अध्ययन के लेखक ची चेन कहते हैं कि एक तिहाई पेड़-पौधे चीन और भारत में स्थित हैं, परंतु ग्रह की जंगल से ढकी जमीन का सिर्फ नौ प्रतिशत इलाका ही इनके पास है। उन्होंने ज्यादा आबादी वाले इन देशों में अत्यधिक दोहन के कारण भू क्षरण की आम अवधारणा के मद्देनजर इस तथ्य को हैरान करने वाला बताया है।

एक प्रसिद्ध विज्ञान पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन में बताया गया है​ कि साल 2000-2017 तक उपग्रहों के आंकड़ों से इस प्रक्रिया की जानकारी मिली। यह मुख्यत: चीन और भारत में हुई है। नासा का अध्ययन कहता है कि चीन के हरेभरे होने की वजह वन (42 प्रतिशत) और कृषिभूमि (32 प्रतिशत) हैं। वहीं भारत विशेष रूप से कृषिभूमि (82 प्रतिशत) की वजह से हराभरा हुआ।

चीन वनों की तादाद बढ़ाने के लिए कई कार्यक्रम चला रहा है। इनके जरिए भूक्षरण को रोकने के अलावा वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं का मुकाबला करने की चुनौती का सामना कर रहा है। नासा की अनुसंधान वैज्ञानिक और अध्ययन की सह लेखिका रमा नेमानी ने कहा है कि इन दोनों देशों में सत्तर और अस्सी के दशक में पेड़-पौधों के संबंध में हालात ठीक नहीं थे। हालांकि नब्बे के दशक में लोगों को इस बात का अहसास हुआ और आज इसमें सुधार दिखाई दे रहा है।

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