बेंगलूरु/दक्षिण भारतशहर के बुल टेम्पल रोड स्थित आनंदा प्लेटिनम अपार्टमेन्ट में निर्माणाधीन विमलनाथ जैन मंदिर का सोमवार को आचार्यश्री रत्नसेनसूरीश्वरजी की निश्रा में भूमिपूजन व खनन मुहूर्त विधान कराया गया। इसके बाद आचार्यश्री नगरथपेट जैन मंदिर पहंुचे । जहां पन्यास श्री भद्रंकरविजयजी गणिवर्यजी की ३८वीं पुण्यतिथि निमित्ते अजिनाथ जैन मंदिर में आचार्यश्री का मंगल प्रवेश हुआ । २५ अप्रैल से आयोजित पांच दिवसीय कार्यक्रम में पहले दो दिन भगवान महावीर स्वामी के केवलज्ञान व शासन स्थापना दिन के उपलक्ष्य में समूह सामायिक होगी। २७ अप्रैल को सुबह नमस्कार महामंत्र की आराधना भाष्य जाप होगा। २८ को अजितनाथ भवन के च्यवन कल्याण निमित्त पंच महाभिषेक होंगे। २९ अप्रैल को पन्यासश्री की पुण्यतिथि के मौके पर गुणानुवाद सभा व आचार्यश्री द्वारा लिखित २०१वीं पुस्तक ’’महान योगी पुरुष’’ का विमोचन होगा। आराधना भवन में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आचार्यश्री ने कहा कि जिस प्रकार विद्यार्थी वर्षभर चाहे कितनी भी प़ढाई कर ले, यदि परीक्षा के समय वह तैयार नहीं होता तो उसका पूरा वर्ष व्यर्थ चला जाता है। उसी प्रकार जीवन भर कैसे भी जिया परन्तु मृत्यु के समय को बिगा़ड लिया तो उसका पूरा जीवन व्यर्थ चला जाता है। आचार्यश्री ने कहा कि नवकारमय बने व्यक्ति को विषयों और कषायों से भरे भवसागर में निर्भयता प्राप्त होती है।

LEAVE A REPLY