बेंगलूरु। ल़डाकू हेलीकॉप्टर ध्रुव के नागरिक संस्करण के विनिर्माण में भारत की निजी कंपनियों को हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित करते हुए हिंदुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने नई पहल की है। इसने शुक्रवार को अपने उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (एएलएच) के निर्माण के लिए निजी कंपनियों की भागीदारी आमंत्रित की है। इसके तहत निजी कंपनियों को एचएएल अपनी तकनीक का लाइसेंस सौंपेगी। इस तरह सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एचएएल अब निजी कंपनियों के साथ तकनीक हस्तांतरण के तहत भागीदारी शुरू करेगी। यह रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में भारत के इतिहास का अपनी तरह का पहला कदम माना जा रहा है। एचएएल ने उम्मीद जताई है कि उसके इस कदम से देश में रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र को भारी प्रोत्साहन मिलेगा। कंपनी ने आज जारी एक बयान में कहा कि इससे केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी ’’मेक इन इंडिया’’ मिशन को भी एक कदम आगे ले जाने में सफलता मिलने की उम्मीद है। जानकारी के मुताबिक, एचएएल ने स्वदेश निर्मित एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर ध्रुव के नागरिक संस्करण के विनिर्माण के लिए संभावित निजी कंपनियों से तकनीक हस्तांतरण समझौते के तहत भागीदारी की बोलियां आमंत्रित की हैं। शुरुआती तौर पर कंपनी ने संभावित भागीदार कंपनियों की पहचान करने के लिए उनसे रुचि अभिव्यक्ति (ईओआई) आमंत्रित की है। विज्ञप्ति में एचएएल के सीएमडी टी. सुवर्ण राजू ने कहा कि नागरिक उड्डयन क्षेत्र में हेलीकॉप्टरों की ब़ढती मांग और जरूरत के मद्देनजर एचएएल की तरफ से यह पहल निजी कंपनियों के लिए यह एक मेगा डील साबित होगी। एचएएल ध्रुव के नागरिक संस्करण का डिजाइन प्राधिकरण और ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (ओईएम) होगी। कंपनी को एक विश्वसनीय भारतीय भागीदार कंपनी की तलाश है। किसी निजी भागीदार कंपनी के साथ काम करते हुए एचएएल छोटी अवधि में नागरिक उड्डयन क्षेत्र में हेलीकॉप्टरों की ब़ढती मांग पूरी करने की कोशिश करेगी। इस भागीदारी के लिए चुनी गई कंपनी से उम्मीद की जाएगी कि वह ग्राहकों को अपने उत्पाद के जीवनकाल के दौरान हर प्रकार की जरूरी सेवाएं उपलब्ध करवाएं। वहीं, भागीदार कंपनियों को हेलीकॉप्टर बनाने की तकनीक हस्तांतरित करनेवाली एचएएल लाइसेंस और अन्य ज्ञान आधारित जानकारियां उन्हें सौंपेगी। साथ ही निजी भागीदार कंपनियों को एचएएल की तरफ से एएलएच-ध्रुव (नागरिक संस्करण) के विनिर्माण के उत्पादन के लिए लाइसेंस और अन्य अधिकार दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि एचएएल को एक ऐसे भागीदार की तलाश है जिन्हें इंजीनियरिंग और ऐरोस्पेस उद्योग क्षेत्र में बीते पांच वर्षों का अनुभव हो। एचएएल के साथ भागीदारी की इच्छा रखने वाली कंपनी का नेटवर्थ २ हजार करो़ड रुपए का होना चाहिए, जबकि उसका न्यूनतम टर्नओवर २५०० करो़ड रुपए का हो। यह शर्तें पूरी करने वाली कंपनियों के पास पर्याप्त प्रशिक्षित और प्रतिभाशाली मानव संसाधन भी उपलब्ध होने चाहिए। कंपनी भारत में पंजीकृत होनी चाहिए और इसमें भारतीय नागरिकों की अधिकतम हिस्सेदारी होनी चाहिए। ऐसी कंपनी को एचएएल के साथ भागीदारी के समझौते पर हस्ताक्षर करने की सहमति देनी होगी।

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