मुस्लिम देश में वर्षों से जल रही मां दुर्गा की ज्योति, तूफानों से भी नहीं बुझी

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Fire-Temple
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सुराखानी। आपने भारत और नेपाल में स्थित मां दुर्गा के विभिन्न मंदिरों के बारे में पढ़ा होगा। आज पढ़िए देवी के उस मंदिर की कथा जो यहां से सुदूर मुस्लिम देश में है। यहां देवी की अखंड ज्योति सदियों से जल रही है, परंतु मंदिर वीरान है और शायद ही कोई हिंदू श्रद्धालु यहां दर्शन करने आता है।

इस देश का नाम अजरबैजान है। यहां के सुराखानी इलाके में यह प्राचीन मंदिर ​है। अपनी खूबियों के कारण यह मंदिर इंटरनेट पर काफी मशहूर है। इसे अग्निमंदिर कहा जाता है। स्थानीय लोग इसे आतिशगाह कहते हैं।

वास्तव में यहां का मुख्य आकर्षण है लगातार जल रही ज्योति। ठीक हिमाचल के ज्वाला देवी मंदिर की तरह। बीते वर्षों में कितने ही आंधी-तूफान आए और मौसम ने भी इस जगह का कड़ा इम्तिहान लिया, पर ज्योति जलती रही। यह ज्योति कब से जल रही है, ठीक-ठीक कोई नहीं जानता। हालांकि भारत से इस मंदिर का गहरा रिश्ता रहा है।

पुराने जमाने में भारतीय कारोबारी इसी रास्ते से सामान बेचने जाते थे। उनके काफिले यहां से निकला करते थे। उनमें से ज्यादा कारोबारी उत्तर भारत से होते थे। जब वे इस मंदिर के निकट से गुजरते तो यहां आशीर्वाद लेने जरूर आते।

इस मंदिर में एक पुराना शिलालेख मौजूद है। यह गुरुमुखी लिपि में ​उत्कीर्ण किया गया है, अत: इसकी प्रबल संभावना है कि पंजाब और उसके आसपास के इलाकों से आने वाले श्रद्धालुओं का इस स्थान से काफी लगाव रहा है।

यहां स्थित अग्निकुंड के पास एक त्रिशूल भी है। चूंकि त्रिशूल शिवजी और दुर्गा – दोनों का शस्त्र है। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि इस स्थान का हिंदू धर्म से बहुत गहरा रिश्ता है। मंदिर के पास कुछ कोठरियां बनी हुई हैं। इनमें श्रद्धालु ठहरा करते थे।

ऐतिहासिक विवरण बताते हैं कि 1860 ई. के बाद यह इलाका वीरान होने लगा। पुजारी भी मंदिर छोड़कर चला गया। चूंकि उस दौरान भारत में राजनीतिक उथलपुथल जारी थी। क्रांतिकारियों और अंग्रेजों के बीच जंग चल रही थी। ऐसे में कारोबार पर बुरा असर पड़ा। फिर धीरे-धीरे अग्निमंदिर के उस रास्ते का उपयोग बंद हो गया। यातायात के नए साधनों का आविष्कार होने से लंबे कारोबारी सफर में ऊंटों का उपयोग कम होने लगा। आज यह मंदिर वीरान खड़ा है और श्रद्धालुओं की प्रतीक्षा कर रहा है।

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