सिरसी। पूरे भारतवर्ष में शिवजी के कई स्थान हैं। इसलिए यहां के हर कंकर में शंकर का वास माना गया है। बाबा अमरनाथ से लेकर सुदूर दक्षिण में रामेश्वरम् तक शिव ही शिव के धाम हैं। कहीं वे बर्फ में विराजमान हैं तो कहीं रेगिस्तान में। शिवजी के कई स्थान तो ऐसे हैं जहां उनका स्वत: जलाभिषेक होता रहता है।

ऐसा ही एक दिव्य धाम कर्नाटक के सिरसी नगर के पास है। यहां बहने वाली शलमाला नदी में कई शिवलिंग हैं। माना जाता है कि इस नदी में एक हजार शिवलिंग बनवाए गए। इसलिए यह स्थान सहस्रलिंग नाम से प्रसिद्ध हो गया। यहां का दृश्य बहुत मनोरम है। प्रकृति ने इस स्थान का बहुत सुंदर शृंगार किया है। इसके अलावा जल में विराजमान शिवलिंग अलग ही दृश्य प्रस्तुत करते हैं।

यह इस स्थान का मुख्य आकर्षण है, इसलिए हर साल हजारों लोग इनके दर्शन के लिए आते हैं। वे इस स्थान का पूजन तो करते ही हैं। इसके अलावा तस्वीरें और वीडियो आदि भी लेते हैं। यही वजह है कि इंटरनेट पर इस स्थान की कई तस्वीरें और वीडियो आदि मौजूद हैं।

इन शिवलिंगों का निर्माण जल में मौजूद कठोर चट्टानों को काटकर किया गया है। शिव के साथ विभिन्न सुंदर आकृतियां, जैसे- नंदी, सर्प, चंद्रमा, त्रिशूल आदि का भी ​निर्माण हुआ है। इतिहास के जानकार बताते हैं कि इस धाम के निर्माण का श्रेय सदाशिवराय को दिया जाता है। वे शिवभक्त थे, इ​सलिए शिवजी के दिव्य धाम का निर्माण करवाना चाहते थे। तब उन्होंने सहस्रलिंग का निर्माण करवाया, जो आज प्राचीन विरासत के साथ ही संस्कृति व आस्था का केंद्र बन चुका है।

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