मन की बात : धर्मक्षेत्र में राजनीति पसंद नहीं : प्रकाशचंद ओस्तवाल

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व्यक्ति रोता हुआ जन्म लेता है, जिंदगी भर यदि सांसारिक क्रियाओं में भी रोता ही रहेगा तो मनुष्य का जीवन व्यर्थ है। कहते भी हैं कि मुस्कराहट यदि ईश्वर की सर्वोपरि भक्ति है तो इससे वंचित क्यों रहें? मेरा मानना है सभी को इस जीवन में लगभग हर परिस्थिति को स्वीकारते हुए सदैव हंसते ही रहना चाहिए।

बेंगलूरु। जो सामाजिक अथवा धार्मिक कार्यों में राजनीति करते हैं ऐसे लोगों से मुझे सख्त नफरत है, क्योंकि न मुझे राजनीति आती और न मैं राजनीति जानता व करता हूं। साथ ही साधु-संतों की निश्रा मिलना, परिवारजनों के साथ समय बिताना और मित्रों के साथ हिल-मिल कर रहना सदैव अच्छा लगता है। यह कहना है यहां के वर्द्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ चिकपेट शाखा के मार्गदर्शक एवं गुरु गणेश सेवा समिति कर्नाटक के कार्यकारिणी सदस्य प्रकाश चंद ओस्तवाल का। “मन की बात’ कॉलम के लिए अपनी राय व्यक्त करते हुए ओस्तवाल ने कहा कि जहां साधु-संतों कार्यक्रम हो या समाज हित के कार्यक्रम होते हों वहां राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि “मेरा मानना है राजनीति हमेशा राजनीतिक प्लेटफार्म पर ही होनी चाहिए, लेकिन लोगों की इगो प्रोब्लम धार्मिक व सामाजिक स्तर पर साधु-संतों को भी नहीं बख्सती है। यह बात मुझे बहुत पीड़ादायक लगती है, हालांकि यह मेरे लिए ही नहीं सभी के लिए चिंता का विषय हो सकती है।’ खैर.., अब इसका हल तो परमात्मा अथवा गुरु भगवंतों के पास ही है कि ऐसे लोगों को वे सद्‌बुद्धि दें जो समाज और धर्म के कार्यों में भी अपनी “जागीरदारी’ दिखाने का प्रयास कर किसी एक, दो व्यक्ति को ही नहीं पूरे समाज स्तर पर अनेक प्रकार के अदृश्य नुकसान के भागीदार बनकर कर्म का बंध करते हैं।

अधिकतम समय में अपने चेहरे पर मुस्कान रखने वाले तथा मिलनसार व्यक्तित्व प्रकाशचंद ओस्तवाल ने एक अन्य प्रश्न के उत्तर में कहा कि व्यक्ति रोता हुआ जन्म लेता है, जिंदगी भर यदि सांसारिक क्रियाओं में भी रोता ही रहेगा तो मनुष्य का जीवन व्यर्थ है। कहते भी हैं कि मुस्कराहट यदि ईश्वर की सर्वोपरि भक्ति है तो इससे वंचित क्यों रहें? मेरा मानना है सभी को इस जीवन में लगभग हर परिस्थिति को स्वीकारते हुए सदैव हंसते ही रहना चाहिए। ओस्तवाल सामाजिक व धार्मिक क्षेत्र में अपना प्रेरणास्रोत अपने बालसखाओं क्रमशः चिकपेट शाखा के संरक्षक विजयराज लुणिया व महामंत्री गौतमचंद धारीवाल को मानते हैं। वे अपनी क्षमता के अनुसार निर्धन या जरुरतमंद की मदद करने का भाव रखते हैं। सभी धर्मो में सद्‌भाव रखने वाले 60 वर्षीय ओस्तवाल व इनका परिवार श्रमण संघीय संंत मरुधर केसरी मिश्रीमलजी म.सा., रुपमुनिजी म.सा. व कपिलमुनिजी म.सा. के अनन्य भक्त हैं। राजस्थान के पाली जिले के पिपलियांकलां के निवासी है, जहां इनके परिवार का पुश्तैनी कार्य खेती-बाड़ी का था।

करीब 80 वर्ष पूर्व प्रकाशचंद ओस्तवाल के पिता स्व.पन्नालाल ओस्तवाल बिजनेस करने के उद्‌देश्य से बेंगलूरु आ गए। यहां जे किशनलाल फूलचंद लूणिया की फर्म में वर्षों तक नौकरी करने के बाद स्वयं का रेशम का कार्य (पन्नालाल जयराज एण्ड कं) एक मित्र के साथ पार्टनरशिप में शुरु किया। प्रकाशचंद ओस्तवाल भी अपनी शिक्षा-दीक्षा यहीं पूर्ण कर अपने पिता के साथ बिजनेस में शामिल हो गए। वे तीन भाइयों में मझले हैं। प्रकाशचंद ओस्तवाल वर्तमान में होलसेल ज्वैलरी (नगरथपेट) का कार्य करते हैं तथा उनके दो पुत्र महावीर (ज्वैलरी) व अनिल (इलेक्ट्रॉनिक्स) भी अपने-अपने स्तर पर स्थापित हैं। आने वाली 17 फरवरी को पिपलियां कलां गांव में नवनिर्मित विमलनाथ मंदिर की प्रतिष्ठा और निर्माण में ओस्तवाल परिवार ने आर्थिक सहयोग दिया है तथा समय-समय पर साधर्मिक परिवारों के सदस्यों को गुप्त दान देकर पुनवानी के कार्य करते रहते हैं।

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