८ गाय का देशी घी नाक में डालने से पागलपन दूर होता है।८ गाय का देशी घी नाक में डालने से एलर्जी खत्म हो जाती है।८ गाय का घी नाक में डालने से लकवा का रोग में भी उपचार होता है।८ (२०-२५ ग्राम) घी व मिश्री खिलाने से शराब, भांग व गांझे का नशा कम हो जाता है।८ गाय का घी नाक में डालने से कान का पर्दा बिना ओपरेशन के ही ठीक हो जाता है।८ नाक में घी डालने से नाक की खुश्की दूर होती है और दिमाग तरोताजा हो जाताहै।८ गाय का घी नाक में डालने से कोमा से बाहर निकल कर चेतना वापस लोट आती है।८ गाय का घी नाक में डालने से बाल झ़डना समाप्त होकर नए बाल भी आने लगते हैं।८ गाय के घी को नाक में डालने से मानसिक शांति मिलती है, याददाश्त तेज होती है।८ हाथ पाव में जलन होने पर गाय के घी को तलवों में मालिश करें जलन ठीक होता है।८ हिचकी के न रुकने पर खाली गाय का आधा चम्मच घी खाए, हिचकी स्वयं रुक जाएगी।८ गाय के घी का नियमित सेवन करने से एसिडिटी व कब्ज की शिकायत कम हो जाती है।८ गाय के घी से बल ब़ढता है और शारीरिक व मानसिक ताकत में भी इजाफा होता है८ गाय के पुराने घी से बच्चों को छाती और पीठ पर मालिश करने से कफ की शिकायत दूर हो जाती है।८ अगर अधिक कमजोरी लगे, तो एक गिलास दूध में एक चम्मच गाय का घी और मिश्री डालकर पी लें।८ हथेली और पांव के तलवों में जलन होने पर गाय के घी की मालिश करने से जलन में आराम आएगा।८ गाय का घी न सिर्फ कैंसर को पैदा होने से रोकता है और इस बीमारी के फैलने को भी आश्चर्यजनक ढंग से रोकता है।८ जिस व्यक्ति को हार्ट अटैक की तकलीफ है और चिकनाई खाने की मनाही है तो गाय का घी खाएं, हृदय म़जबूत होता है।८ देसी गाय के घी में कैंसर से ल़डने की अचूक क्षमता होती है। इसके सेवन से स्तन तथा आंत के खतरनाक कैंसर से बचा जा सकता है।८ घी, छिलका सहित पिसा हुआ काला चना और पिसी शक्कर (बूरा) तीनों को समान मात्रा में मिलाकर लड्डू बाँध लें। प्रात: खाली पेट एक लड्डू खूब चबा-चबाकर खाते हुए एक गिलास मीठा गुनगुना दूध घूँट-घूँट करके पीने से ्त्रिरयों के प्रदर रोग में आराम होता है, पुरुषों का शरीर मोटा ताजा यानी सुडौल और बलवान बनता है।८ फफोलों पर गाय का देशी घी लगाने से आराम मिलता है।८ गाय के घी की झाती पर मालिस करने से बच्चों के बलगम को बहार निकालने में सहायक होता है।८ सांप के काटने पर १०० -१५० ग्राम घी पिलाएं ऊपर से जितना गुनगुना पानी पिला सके पिलाएं जिससे उलटी और दस्त तो लगेंगे ही लेकिन सांप का विष कम हो जाएगा।८ दो बूंद देशी गाय का घी नाक में सुबह शाम डालने से माइग्रेन दर्द ठीक होता है।८ सिर दर्द होने पर शरीर में गर्मी लगती हो, तो गाय के घी की पैरों के तलवे पर मालिश करें, सर दर्द ठीक हो जाएगा।८ यह स्मरण रहे कि गाय के घी के सेवन से कॉलेस्ट्रॉल नहीं ब़ढता है। वजन भी नही ब़ढता, बल्कि वजन को संतुलित करता है। यानी के कमजोर व्यक्ति का वजन ब़ढता है, मोटे व्यक्ति का मोटापा (वजन) कम होता है।८ एक चम्मच गाय का शुद्ध घी में एक चम्मच बूरा और १/४ चम्मच पिसी काली मिर्च इन तीनों को मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय चाट कर ऊपर से गर्म मीठा दूध पीने से आँखों की ज्योति ब़ढती है।८ गाय के घी को ठन्डे जल में मिला लें और फिर घी को पानी से अलग कर ले यह प्रक्रिया लगभग सौ बार करे और इसमें थो़डा सा कपूर डालकर मिला दें। इस विधि द्वारा प्राप्त घी एक असर कारक औषधि में परिवर्तित हो जाता है जिसे त्वचा सम्बन्धी हर चर्म रोगों में चमत्कारिक कि तरह से इस्तेमाल कर सकते है। यह सौराइशिस के लिए भी कारगर है।८ गाय का घी एक अच्छा कोलेस्ट्रॉल है। उच्च कोलेस्ट्रॉल के रोगियों को गाय का घी ही खाना चाहिए। यह एक बहुत अच्छा टॉनिक भी है।८ अगर आप गाय के घी की कुछ बूँदें दिन में तीन बार, नाक में प्रयोग करेंगे तो यह त्रिदोष (वात पित्त और कफ) को संतुलित करता है।

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