दावोस। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और ’’सिकु़डते वैश्वीकरण’’ को दुनिया के सामने तीन प्रमुख चुनौतियां बताते हुए इसके समाधान के लिए प्राचीन भारतीय दर्शन के अनुरूप सभी देशों से मिलकर काम करने का आह्वान किया। इसके साथ ही उन्होंने विभिन्न वैश्विक संस्थाओं में मौजूदा समय के अनुरूप बदलाव को भी जरूरी बताया। मोदी ने यहां विश्व आर्थिक मंच की ४८वीं वार्षिक बैठक के पूर्ण सत्र में मंगलवार को अपने उद्घाटन भाषण में जलवायु परिवर्तन को ब़डी चुनौती बताते हुए कहा कि इसके कारण ग्लेशियर पिघल रहे हैं, कई द्वीप डूब चुके हैं या डूबने की कगार पर हैं, बहुत गर्मी, बहुत सर्दी, कहीं बा़ढ तो कहीं सूखे की समस्या आ रही है। उन्होंने कहा कि इसके लिए सीमित दायरों से निकलकर सभी देशों को इससे मुकाबले के लिए एक हो जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि हमें अपने आप से पूछना चाहिए कि क्या ऐसा हुआ है। यदि नहीं तो क्यों? उन्होंने कहा हर कोई कहता है कि कार्बन उत्सर्जन कम हो, पर ऐसे कितने देश हैं जो विकासशील देशों को इसके लिए तकनीक उपलब्ध कराने के लिए आगे आते हैं। मोदी ने कहा कि भारतीय परंपरा में पृथ्वी को माता माना गया है। यदि हम पृथ्वी की संतान हैं तो प्रकृति और मानव के बीच संघर्ष क्यों चल रहा है? लालचवश हम अपने सुखों के लिए प्रकृति का शोषण तक कर रहे हैं। हमें अपने आप से पूछना होगा कि यह विकास हुआ है या ह्रास।प्रधानमंत्री ने आतंकवाद को दूसरी ब़डी चुनौती बताते हुए ’’अच्छे आतंकवादी और बुरे आतंकवादी’’ के बीच बनाए गए कृत्रिम भेद का मुद्दा उठाया और परोक्ष रूप से पाकिस्तान को घरते हुए कहा कि आतंकवाद जितना खतरनाक है उससे भी खतरनाक है ’’गुड टेररिस्ट’’ और ’’बैड टेररिस्ट’’ के बीच बनाया गया कृत्रिम भेद। उन्होंने प़ढे-लिखे और संपन्न लोगों का अतिवाद की ओर आकर्षित होकर आतंकवाद में लिप्त होने को भी गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खतरे से आज पूरी दुनिया वाकिफ है इसलिए वह इस पर ज्यादा नहीं बोलना चाहते। मोदी ने दुनिया के देशों के आत्मकेंद्रित होने पर चिंता जताते हुए कहा कि वैश्वीकरण की चमक धीरे-धीरे कम हो रही है। उन्होंने कहा, बहुत से समाज और देश ज्यादा से ज्यादा आत्मकेंद्रित हो रहे हैं। वैश्वीकरण अपने नाम के विपरीत सिकु़डता जा रहा है। इसे आतंकवाद के खतरे से कम नहीं आंका जा सकता। उन्होंने कहा कि संरक्षणवाद और उनकी ताकतें सर उठा रही हैं। उनकी मंशा न सिर्फ वैश्वीकरण से बचने की है, बल्कि उनका प्रयास इसका प्राकृतिक प्रवाह बदलने का भी है। क्रॉस बॉर्डर निवेश में कमी आई है, वैश्विक आपूर्ति श्रंखला की वृद्धि रुकी हुई है। इसका समाधान परिवर्तन को समझने और उसे स्वीकार करने में है।

दावोस। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के दरवाजे विदेशी निवेशकों के लिए खोलने और कारोबार की आसानी की दिशा में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए वैश्विक निवेशकों को निवेश के लिए आमंत्रित किया तथा कहा कि उनकी सरकार के निर्भीक और असरदार कदमों से स्थितियां पूरी तरह बदल गई हैं। मोदी ने यहां विश्व आर्थिक मंच की ४८वीं बैठक के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने आर्थिक और सामाजिक नीतियों में आमूलचूल परिवर्तन किया है। लाल फीताशाही हटाकर निवेशकों के लिए ’’रेड कार्पेट’’ बिछाया गया है। अधिकतर क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के दरवाजे खोल दिए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व के शीर्ष कारोबारियों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ)के साथ बैठक के दौरान अपनी ’’अनूठी शैली’’और घनिष्ठता से सबका मन मोह लिया। साथ ही उनके समक्ष वैश्विक स्तर पर निवेश और कारोबार के उत्साहजनक अवसर प्रस्तुत किए। इस गोल मेज वार्ता में वैश्विक कंपनियों के ४० से ज्यादा और भारत के २० सीईओ मौजूद थे। गोल मेज वार्ता का सूत्र वाक्य ’’इंडिया मीन्स बिजनेस (भारत यानी कारोबार की सुगमता)’’ था। इस बैठक में भाग लेने वाले महिंद्रा समूह के अध्यक्ष आनंद महिंद्रा ने ट्वीट किया, सीईओ के सम्मान में दिए गए रात्रिभोज में प्रधानमंत्री मोदी ने प्रत्येक सीईओ की बात का जवाब दिया। विदेशी सीईओ सहित बैठक में शामिल प्रत्येक व्यक्ति के साथ वह व्यक्तिगत रूप से जु़ड गए। ऐसी अनूठी शैली प्राय: दावोस में देखने को नहीं मिलती। महिंद्रा ने कहा, मोदी के संबोधन की अब और अधिक प्रतीक्षा और उम्मीदें होंगी। आपने (मोदी) अपने बेहतरीन का प्रदर्शन कर हमें गौरवांकित किया है। आपके आतिथ्य की गर्मजोशी से दुनिया का प्रत्येक सीईओ आपका कायल हो गया।

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