lakshmi pujan
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बेंगलूरु। भारतवर्ष में दिवाली का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। प्रतिवर्ष यह कार्तिक माह की अमावस्या को मनाई जाती है। रावण से दस दिन के युद्ध के बाद भगवान श्रीराम जब अयोध्या वापिस आते हैं तब उस दिन कार्तिक माह की अमावस्या थी, उस दिन अयोध्या के घर-घर में असंख्य दिए जलाए गए थे। तब से इस त्योहार को दीपावली के रूप में मनाया जाने लगा और समय के साथ और भी बहुत सी बातें इस त्योहार के साथ जुड़ती चली गईं।

इस वर्ष 7 नवम्बर, 2018 बुधवार के दिन यह त्योहार हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जाएगा। दीपावली के दिन महालक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व माना गया है, इसलिए यदि इस दिन शुभ मुहूर्त में पूजा की जाए तो महालक्ष्मी स्थिर रूप से पूजक के घर में तथा व्यापार में निवास करती है।

ब्रह्मपुराण के अनुसार, आधी रात तक रहने वाली अमावस्या तिथि ही महालक्ष्मी पूजन के लिए श्रेष्ठ होती है। यदि अमावस्या आधी रात तक नहीं होती है तब प्रदोष व्यापिनी तिथि लेनी चाहिए। लक्ष्मी पूजा व दीप दानादि के लिए प्रदोषकाल तथा स्थिर लग्न ही विशेष शुभ माने गए हैं।

प्रदोष काल व स्थिर लग्न
7 नवम्बर, 2018 बुधवार के दिन बेंगलूरु तथा आसपास के क्षेत्रों में 17:30 से 20:11 तक प्रदोष काल रहेगा। इसे प्रदोष काल का समय कहा जाता है। प्रदोष काल समय को दीपावली पूजन के लिये शुभ मुहूर्त के रुप में प्रयोग किया जाता है। प्रदोष काल में भी स्थिर लग्न समय सबसे उत्तम रहता है। इस दिन प्रथम स्थिर लग्न वृश्चिक प्रातः 7:39 से 9:56 तक द्वितीय स्थिर लग्न कुम्भ मध्याह्न 1:46 से 3:17 तक तृतीय स्थिर लग्न वृषभ सायंकाल 6:21 से 8:17 तक तथा चतुर्थ स्थिर लग्न सिंह रात्रि शेष 12:59 से 3 बजकर 6 मिनिट तक रहेंगे।

निशीथ काल
बेंगलूरु नगर के स्थानीय समय के अनुसार 7 नवम्बर को 20:11 से 22:51 तक निशिथ काल रहेगा। निशिथ काल में 19:10 से 20:51 तक की शुभ उसके बाद अमृत की चौघड़िया रहेगी, से में व्यापारियों वर्ग के लिए लक्ष्मी पूजन के लिए इस समय की अनुकूलता रहेगी।

महा निशीथ काल
7 नवम्बर, 2018 की रात्रि में 22:51 से 25:31 मिनट तक महानिशीथ काल रहेगा। महानिशीथ काल में पूजा समय चर लग्न में कर्क लग्न उसके बाद सिंह लग्न भी हों, तो विशेष शुभ माना जाता है। महानिशीथ काल में कर्क लग्न और सिंह लग्न होने के कारण यह समय शुभ हो गया है। जो सनातन शास्त्रों के अनुसार दीपावली पूजन करना चाहते हों, उन्हें इस समयावधि को पूजा के लिए उपयोग करना चाहिए।

व्यापारी वर्ग को धन लक्ष्मी का आवाहन एवं पूजन, गल्ले की पूजा तथा हवन इत्यादि कार्य पहले ही सम्पूर्ण कर लेना चाहिए। इसके अतिरिक्त महानिशीथ काल में महालक्ष्मी पूजन, महाकाली पूजन, लेखनी, कुबेर पूजन तथा मंत्र जपानुष्ठान तथा महालक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त करने हेतु श्री सूक्त का पाठ करना चाहिए।

दीपावली के दिन महालक्ष्मी पूजन, कुबेर पूजन, गल्ला पूजन, मंत्र जाप तथा विशेष श्री सूक्त अनुष्ठान के लिए प्रदोष काल, निशीथ काल, महानिशीथ काल तथा चारों स्थिर लग्न सर्वश्रेष्ठ माने गए हैं।

आचार्य श्रीधर खाण्डल
मो. 88847 69193

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