चेन्नई/दक्षिण भारतदिगम्बर आचार्यश्री पुष्पदंतसागरजी का बुधवार को तेरापंथ के मुनि ज्ञानेंद्रकुमारजी से आध्यात्मिक मिलन हुआ। यहां कांचीपुरम् के आईएनके मंडपम में सामूहिक प्रवचन को संबोधित करते हुए मुनि ज्ञानेंद्रकुमारजी ने कहा कि नैतिकता ही धर्म की आधारशिला है, जहां नैतिकता नहीं,वहां धार्मिकता नहीं। व्यक्ति पहले नैतिक बनें फिर वह धार्मिक बनने का प्रयास करें। व्यक्ति को कषायमुक्त जीवन जीने के लिए अपने आवेगों और आवेशों को नियंत्रण में करना चाहिए। आचार्य पुष्पदंत सागरजी ने कहा कि जैनधर्म भले ही दिगम्बर और श्वेताम्बर परम्परा में विभक्त है लेकिन दोनों ही सम्प्रदायों का मूल आधार है वीतरागता को प्राप्त करना। जैनधर्म का मूल उद्देश्य है आत्मा को परमात्मा तक ले जाना और इसके लिए कर्म सिद्धान्त को गहराई से समझना होगा। मुनिश्री ज्ञानेंद्रकुमारजी और आचार्यश्री पुष्पदंत सागरजी की गहन वार्ता हुई। इस मौके पर मुनि विमलेश कुमारजी, मुनि सुबोधकुमारजी भी उपस्थित थे।

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