चेन्नई। राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी द्रवि़ड मुनेत्र कषगम(द्रमुक) के कार्यकारी अध्यक्ष एमके स्टालिन ने देश की गैर भाजपा शासित १० राज्य सरकारों को पत्र लिखकर १५ वित्त आयोग से जु़डे मुद्दों को उठाया है। स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी पत्र लिखकर वित्त आयोग के मापदंडों के निर्धारण की ओर ध्यान आकृष्ट किया है। द्रमुक नेता ने तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, ओि़डसा, पंजाब, केरल, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और पुदुच्चेरी सरकार को पत्र लिखा है।स्टालिन ने पत्र में कहा है कि वह १५ वें वित्त आयोग के कुछ निश्चित तथ्यों और शर्तों को लेकर चिंतित हैं जिससे राज्यों को केन्द्रीय टैक्स राजस्वों का भुगतान प्रभावित होने की संभावना है। संविधान की धारा १५ के ४२ वें संशोधन के मुताबिक वर्ष २००१ तक सभी सरहदबंदी संबंधी कार्यों के लिए जनसंख्या का निर्धारण १९७१ की जणगणना की मुताबिक होगा और बाद में इसका वर्ष २०२६ तक विस्तार कर दिया गया।हालांकि आयोग ने एकपक्षीय निर्णय लेते हुए अपनी सिफारिशों को लागू करने के दौरान वर्ष २०११ की जनगणना का उपयोग किया। स्टालिन ने कहा कि वित्त आयोग द्वारा वर्ष २०११ की जनगणना के आंक़डों का उपयोग करने के कारण कई प्रगतिशील राज्यों पर नकरात्मक प्रभाव प़डेगा। इससे हमें अपनी मौजूदा आबादी से काफी कम आबादी के आधार पर वित्तीय आवंटन प्राप्त होगा और केन्द्र की ओर से जनसंख्या के आधार पर दी जाने वाली राशि से वंचित रह जाएंगे।स्टालिन ने कहा कि वित्त आयोग द्वारा वर्ष २०११ की जनगणना का संदर्भ देने के कारण केन्द्रीय राजस्व में से राज्यों को मिलने वाला हिस्सा कम होगा। इसका सीधे-सीधे राज्य के संसाधनों पर प्रभाव प़डेगा। राज्य द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र से टैक्स केन्द्र को स्थानांतरित किया जाएगा उसमें से राज्य को अपने हिस्से से काफी कम राजस्व केन्द्र द्वारा लौटाया जाएगा। स्टालिन ने सभी मुख्यमंत्रियों से अनुरोध किया है कि वह इस मुद्दे को केन्द्र सरकार के समक्ष उठाएं और वित्त आयोग द्वारा निर्धारित मापदंडों की समीक्षा करने का अनुरोध करें।

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