चेन्नई/दक्षिण भारतपूर्व केन्द्रीय मंत्री और पट्टालि मक्कल कच्चि(पीएमके) के नेता अंबुमणि रामदास ने चेन्नई से सेलम को जो़डने वाले ग्रीनवे कोरीडोर के लि ए भूमि अधिग्रहित करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण(एनएचएआई) की अधूसचना को निरस्त करने की मांग के साथ मद्रास उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। अंबुमणि ने अपनी याचिका में यह प्राथमिक आरोप लगाया है कि किसी भी परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहित करने से पूर्व भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत उस परियोजना के कारण प़डने वाले सामाजिक प्रभाव का अध्ययन करना आवश्यक है लेकिन एनएचएआई इस परियोजना के बारे में विस्तृत अध्ययन करने में विफल हुआ है।अंबुमणि ने अपनी याचिका में कहा है कि इस अध्ययन में इस बात का विवरण नहीं प्राप्त किया गया है कि इस परियोजना के कारण प्रभावित होने वाले परिवारों की संख्या क्या है? इस परियोजना के लिए आवश्यक न्यूनतम भूमि कितनी है। क्या इसके विकल्पों पर विचार किया गया है और इसका विकल्प व्यवहारिक हैं या नहीं? इन सभी पहलुओं पर गौर करना भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत अनिवार्य है लेकिन इस मामले में इन्हें नजरअंदाज कर दिया गया है इसलिए इस परियोजना को शुरु करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। अंबुमणि ने आरोप लगाया है कि परियोजना के लिए कार्य करने वाली एजेंसियां सिर्फ अपनी सुविधा के अनुसार कार्य कर रही हैं और इसके लिए जिन लोगों की जमीन अधिग्रहित की जानी है उनकी बातों और मांगों पर विचार नहीं कर रही है। अंबुमणि ने अदालत से अनुरोध किया है कि इस मामले में अंतरिम राहत देते हुए भूमि अधिग्रहित करने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए और अधिकारियों को इस परियोजना और इसके विकल्पों के लिए व्यवहार्यता अध्ययन करने के लिए विशेषज्ञता समिति गठित करने का निर्देश दिया जाए। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में यह भी बताया है कि परियोजना के तहत सेलम जिले में स्थित जारुकु पहा़डी को काटकर तीन स्थानों पर सुरंग बनाने की आवश्यकता होगी और इसके लिए भी व्यवहार्यता अध्ययन नहीं किया गया है जिसे लेकर लोगों द्वारा विरोध किया जा रहा है। अदालत ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई आगामी मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी। गौरतलब है कि पीएमके और द्रवि़ड मुनेत्र कषगम(द्रमुक) ग्रीनवे कोरीडोर परियोजना का पुरजोर विरोध कर रही है। दोनों पार्टियों ने सरकार पर इस परियोजना के लिए अधिग्रहित की जाने वाली जमीन मालिकों को उनकी जमीन का समुचित मुआवजा नहीं देने और इसके खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की आवाज दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। हालांकि राज्य की सत्तारुए अखिल भारतीय अन्ना द्रवि़ड मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) ने इन आरोपों का खंडन किया है। मुख्यमंत्री ईके पलानीस्वामी ने कहा है कि इस परियोजना से राज्य का आर्थिक विकास होगा और राज्य सरकार इसे पूरा करने को लेकर कृत संकल्पित है। उल्लेखनीय है कि इस परियोजना को पूरा करने में ११०० करो़ड रुपए की लागत आने का अनुमान है। परियोजना को केन्द्र सरकार की ओर से आवश्यक स्वीकृति दे दी गई है और प्राथमिक चरण के कार्य के लिए राशि भी आवंटित की जा चुकी है।

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