बादामी/ दक्षिण भारत भाजपा ने बीएस श्रीरामुलू को बादामी सीट से ख़डा करके सबको चौंका दिया है। मुख्यमंत्री सिद्दरामैया भी बादामी से चुनाव ल़ड रहे हैं। बागलकोट जिले की बादामी सीट के बारे में लोगों को बहुत कम ही जानकारी रही है। यह एक ऐतिहासिक नगर रहा है और सन् ५४० से सन् ७५७ तक चालुक्य राजाओं की राजधानी हुआ करता था।बहरहाल, दोनों उम्मीदवारों ने मंगलवार को बादामी से अपने-अपने नामांकन पत्र भरे। इस दौरान दोनों दल के समर्थकों में अपार उत्साह नजर आया है। भाजपा समर्थक नरेंद्र मोदी जिंदाबाद और भारत माता की जय का नारा लगाते दिखें। वहीं कांग्रेस समर्थक मुख्यमंत्री सिद्दरामैया की जयजयकार कर रहे थे। दोनों दलों में किसानों, नौजवानों और महिलाओं का अच्छा-खासा हुजूम देखने को मिला। उत्साह से भरपूर भाजपा कायकत्र्ता ढोल-नगा़डों के बीच नाच रहे थे और कुछ ने तो भूरे रंग का सूखा कीच़ड अपने पांव में लगा रखा था।गौरतलब है कि वर्ष २०१३ में यहीं से कांग्रेस की वापसी हुई थी। लिंगायतों की अच्छी-खासी तादाद ने भाजपा को वोट दिया था, इसके बावजूद भाजपा के उम्मीदवार महागुंडप्पा कल्लप्पा पट्टनशेट्टी की हार हुई और कांग्रेस के बैयप्पा भीमप्पा चिम्मनकट्टी ने जीत हासिल की थी। ज्ञातव्य है कि वर्ष २००४ और २००८ के चुनाव में भाजपा के महागुंडप्पा कल्लप्पा पट्टनशेट्टी विजयी रहे थे।यहां उल्लेखनीय है कि इस सीट में कुरुबा समुदाय की भी अच्छी-खासी संख्या है। सिद्दरामैया भी इसी समुदाय से आते हैं्। इसीलिए इसे मुख्यमंत्री के लिए सुरक्षित सीट माना जा रहा है। हालांकि सिद्दरामैया मैसूरु क्षेत्र के चामुंडेश्वरी से भी चुनाव ल़ड रहे हैं। जहां उन्हें जनता दल (एस) के जीटी देवेगौ़डा क़डी चुनौती दे रहे हैं। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि बादामी से सिद्दरामैया को ख़डा करने का हमारा फैसला अपने आप में बाजी पलट देनेवाला है। इसमें कोई शक नहीं कि मुख्यमंत्री की इस रणनीतिक चाल से भाजपा को झटका लगा है। कांग्रेस भी यह दावा कर रही है कि उत्तरी कर्नाटक में बाजी कांग्रेस के पक्ष में पलट चुकी है।वर्ष २०१३ में बागलकोट जिले की सात सीटों में से छह पर कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। हालांकि भाजपा नेता व केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार ने उन्हें प्रवासी पक्षी बता कर अपनी भ़डास निकालने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जहां कहीं भी पलायन करें, कर्नाटक की जनता उन्हें मात देनेवाली है। वे आम जनता के गुस्से से बचकर निकल नहीं सकते। चुनावी रणनीति के तहत भाजपा ने नायक अनुसूचित जनजाति के श्रीरामालू को बादामी से ख़डा करने का फैसला किया। इस सीट में अनुसूचित जनजाति के २५,००० हजार मतदाता हैं, जिनमें से अधिकांश वाल्मीकि हैं। बताया जाता है कि श्रीरामुलू को उम्मीदवार बनाए जाने से वे काफी उत्साहित हैं। ४२ वर्षीय भाजपा समर्थक नागेश पोरित बहुत ही ज्यादा उत्साहित हैं और वे अपने साथियों के साथ बार-बार भाजपा जिंदाबाद और नरेंद्र मोदी जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं।नागेश का कहना है कि भाजपा समर्थकों में यह नारा बहुत ही ज्यादा लोकप्रिय है। श्रीरामुलू के आने से इस लोकप्रियता में और अधिक इजाफा हुआ है। लोगों के लिए चुनाव कोई नई चीज नहीं है, लेकिन इस बार भाजपा उम्मीदवार के चयन से लोगों में एक नई उम्मीद जागी है। भाजपा कार्यकत्र्ता महसूस करते हैं कि मुख्यमंत्री सिद्दरामैया का लिंगायत कार्ड उल्टा असर दिखानेवाला है, क्योंकि यहां के प्रख्यात शिवयोगी मंदिर मठ के अनुयायी लिंगायत आमतौर पर अल्पसंख्यक’’ तगमे का विरोध कर रहे हैं।स्थानीय भाजपा नेता तिमिर रमेश ने कहा कि ज्यादातर लिंगायत इस अल्पसंख्यक तमगे का समर्थन नहीं कर रहे, क्योंकि आरक्षण के जरिए उनमें से अनेक को सरकारी सुविधाएं प्राप्त हो रही है। इसके अलावा हिंदुत्व तत्व हरदम से ही मजबूत रहे हैं। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि शिवयोगी मंदिर मठ को एक सदी से अधिक समय पहले हंगल कुमार स्वामीजी ने स्थापित किया था, जो कि अखिल भारत वीराशैव महासभा से जु़डे रहे। यह महासभा अलग धर्म’’ के कदम को खारिज करती है।भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी वीराशैवा धर्मगुरुओं से मुलाकात की, वे लोग भी लिंगायतों के लिए अल्पसंख्यक तगमे का विरोध कर रहे हैं। हालांकि कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि मुख्यमंत्री की यह चाल ब़डी तग़डी है। इसे मास्टर स्ट्रोक भी बताया जा रहा है। स्थानीय एक कांग्रेसी कार्यकत्र्ता राजेश कुमार का कहना है कि कुरुवा वोटों पर कांग्रेस का निर्भर करना सही फैसला है। इस सीट में कुरुबा समुदाय के ५०,००० मतदाता हैं, जिनमें से ज्यादातर सिद्दरामैया को ही वोट देंगे। इनके अलावा १५,००० मुसलमान मतदाता भी कांग्रेस के साथ हैं।बहरहाल, एचडी देवेगौ़डा के नेतृत्ववाली जनता दल (एस) पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। वर्ष २०१३ में जनता दल (एस) उम्मीदवार महंतेश गुरुपादप्पा मामदापुर को द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ था। मामादापुर लिंगायत समुदाय से आते हैं और वे भाजपा में शामिल हो गए। उन्हें उम्मीद थी टिकट उन्हें ही मिलेगा, लेकिन अब कहा नहीं जा सकता कि उनका समर्थन किस ओर जानेवाला है। पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष हनुमंत मावीनामराड, जो पंचमशील-लिंगायत के नेता है, को भाजपा टिकट देनेवाली थी। माना जा रहा है कि वे भी भाजपा के वोट को नुकसान पहुंच सकते हैं लेकिन कुछ लोगों का यह भी मानना है कि वे कांग्रेस के वोट काटेंगे। बहरहाल, बादामी से चुनाव ल़डने का सिद्दरामैया का फैसला सही साबित होगा या गलत, यह तो समय ही बताएगा। मतदाताओं के मन की बात समझ पाना टे़ढी खीर है।

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