चेन्नई। तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने शनिवार को राज भवन में राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ बैठक बुलाई। सत्रह उप कुलपतियों और १८ रजिस्ट्रारों ने इस बैठक में भाग लिया, यह पहली बार है जब उन्होंने राज्य के राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभालने के बाद ऐसी बैठक बुलाई है। हाल ही में भ्रष्टाचार रोधि और सतर्कता निदेशालय के अधिकारियों द्वारा रिश्वतखोरी के आरोप में भरतियार विश्वविद्यालय के कुलपति ए गणपति गिरफ्तार करने के बाद से ही राज्य के विश्वविद्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर प्रश्न उठाए जा रहे थे। इस प्रकार के आरोपों के मद्देनजर राज्यपाल ने राजभवन में यह बैठक बुलाई।्यप्यद्नस्त्रय् ्यप्प्तद्भह्र झ्द्य ·र्ैंर्‍ घ्घ्य्श्चबैठक के दौरान राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने भी आगामी शैक्षणिक वर्ष, शिक्षा के विकास और विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों के दाखिले के दर में सुधार करने के बारे में कुलपतियों के साथ चर्चा की। उन्होंने पिछले कुछ वर्षों के दौरान राज्य के विश्वविद्यालयों की गई सभी नियुक्तियों की भी समीक्षा की। सूत्रों के अनुसार राज्यपाल ने कई विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से उनके विश्वविद्यालय की विभिन्न गतिविधियों के बारे में रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया है। राज्यपाल ने इस बैठक के दौरान मुख्य रुप से उन विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को रिपोर्ट सौंपने के बारे में कहा है जिनके बारे में पिछले कुछ समय से शिकायतें प्राप्त हो रही हैं।सूत्रों के अनुसार कई विश्वविद्यालयों के व्ख्यायाता और गैर शैक्षणिक कर्मचारियों ने राज्यपाल से मुलाकात कर उन्हें अपने-अपने विश्वविद्यालयों में हो रही अनियमितताओं के बारे में ज्ञापन सौंपा है और समुचित कदम उठाने का अनुरोध किया है। राज्यपाल ने इन शिकायतों को स्वीकार करने के बाद कर्मचारियों को यह आश्वासन दिया था कि वह राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति होने के नाते विश्वविद्यालयों में चल रही अनियमितताओं को रोकने के लिए समुचित कदम उठाएंगे।ख्रह् झ्रूप्श्च ·रु ध्झ्यत्र द्नर्‍ ज्य्ैंघ् ·द्द च्चय्ष्ठद्यष्ठ द्बष्ठ्रमीडिया में आ रही जानकारी के अनुसार भरतियार विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति, जी जेम्स पिचई और सी स्वामिनाथन भी बेहिसाब परिसंपत्तियों के मालिक हैं और संस्थान में अवैध ढंग से कर्मचारियों की नियुक्ति करने और उन्हें बर्खास्त करने के आरोपों में डीवीएसी की जांच का सामना कर रहे हैं। ज्ञातव्य है कि राज्य की कई विपक्षी पार्टियों ने राज्य के विश्वविद्यालयों में हो रही अनियमितताओं की केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की थी। ्सत्रों के अनुसार राज्य के विश्वविद्यालयों में कई प्रकार की प्रशासनिक समस्या है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अपने यहां होने वाली नियुक्तियों और पदोन्नति के लिए विश्चविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मापदंडों का पालन नहीं किया जाता, कुलपतियों को उनकी योग्यता के बदले राजनीतिक सिफारिश के आधार पर नियुक्त किया जाता है और विद्यार्थियों को उनकी डिग्री समय से नहीं सौंपी जाती है। ज्ञातव्य है कि समय-समय पर विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों द्वारा यह आरोप लगाया जाता है कि कुलपति पद के लिए अभ्यर्थियों का चयन करने के दौरान कई वरिष्ठ सहायक व्याख्याताओं के नाम पर विचार करने के बदले राजनीतिक प्रभाव रखने वाले कनिष्ठ व्याख्याताओं को कुलपति नियुक्त कर दिया जाता है। राज्य व्याख्याता संघ द्वारा लंबे समय से इस समस्या की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट करने की कोशिश की जा रही है।

LEAVE A REPLY