बेंगलूरु/दक्षिण भारतराज्य के शहरी इलाकों में चुनाव-दर-चुनाव मतदान प्रतिशतता में आ रही गिरावट ने चुनाव आयोग के लिए अबूझ पहेली ख़डी कर दी है। इसके तमाम प्रयासों और मतदाताओं को जागरूक करने के लिए छे़डे गए अभियानों का कोई सकारात्मक असर प़डता नहीं दिख रहा है। १२ मई को होने जा रहे विधानसभा चुनाव के दौरान स्थिति में बदलाव लाने के लिए आयोग कई प्रकार की कोशिशों में जुटा है, ताकि शहरी क्षेत्रों के मतदाता चुनाव के दिन अधिक से अधिक संख्या में घरों से बाहर निकलें और अपने-अपने मतदान केंद्रों पर जाकर मताधिकार का प्रयोग करें। आयोग के सूत्रों ने बताया कि शहरी मतदाता, खास तौर पर प़ढे-लिखे और नई पी़ढी के कामगारों का वर्ग अपने मताधिकार को एक अधिकार के रूप में नहीं देखते, बल्कि घर में आराम फरमाने या फिर घूमने का मौका समझते हैं्। इससे बेंगलूरु, मैसूरु, हुब्बल्ली-धारवा़ड जैसे ब़डे शहरों की मतदान प्रतिशतता में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। दो वर्ष पहले बृहत बेंगलूरु महानगर पालिके (बीबीएमपी) के चुनव में मात्र ४५ प्रतिशत मतदान हुआ था। वर्ष २०१३ के विधानसभा और वर्ष २०१४ के लोकसभा चुनावों में भी हालात एक ही जैसे रहे थे। इन चुनावों में बेंगलूरु का मतदान प्रतिशत सबसे कम रहा था। शहरी इलाकों में शिक्षित मतदाताओं की मतदान प्रतिशतता ब़ढाने के लिए चुनाव आयोग ने हाल में एक सर्वेक्षण करवाया है। इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल एंड इकोनॉमिक चेंज (आईएसईसी) के एस. मादेश्वरन ने यह सर्वेक्षण किया है। इसमें यह जानने की कोशिश की गई कि मतदाताओं को चुनाव प्रक्रिया के बारे में कितनी जानकारी है। सर्वेक्षकों की सिफारिशों के आधार पर चुनाव आयोग मतदाताओं को मताधिकार के महत्व के बारे में जागरूक करने के कदम उठा रहा है। इसे उम्मीद है कि राज्य में पहली बार मतदान करनेवाली पी़ढी के मतदाता कम मतदान के चलन में बदलाव ला सकते हैं्। राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी संजीव कुमार ने इस हालत की जानकारी देते हुए कहा, ’’हमें उम्मीद है कि युवा मतदाता शिक्षित मतदाताओं के बीच एक नया चलन शुरू करने में सफल होंगे। वर्ष २०१३ की अपेक्षा इस बार होनेवाले चुनाव में पहली बार वोटिंग करनेवाले मतदाताओं की संख्या लगभग दोगुनी है। पिछले चुनाव में इस पी़ढी के मतदाताओं की संख्या ७.१९ लाख थी, जो ब़ढकर १५.४ लाख हो चुकी है।’’ उन्होंने जो़डा कि इस बार के चुनाव के लिए मतदाता सूची में ६० लाख नए मतदाताओं के नाम जो़डे गए हैं और इसके साथ ही राज्य में कुल योग्य मतदाताओं की संख्या ७ करो़ड ७५ लाख हो गई है। इनमें ४.५१ करो़ड पुरुष और २.५५ करो़ड महिला मतदाताओं के साथ ही तृतीय लिंग के ४५५२ मतदाता शामिल हैं। मैसूरु जैसे शहरी इलाकों में शिक्षित और उच्च शिक्षित तबके के वोटरों की तादाद काफी अधिक होने के बावजूद वर्ष २०१३ के विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत काफी नीचा रहा था। जिले की चामराज सीट पर ५५.११ प्रतिशत, कृष्णराज सीट पर ५८.४९ प्रतिशत और नरसिंहराज सीट पर ५४.४४ प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। इसने चुनाव आयोग का ध्यान अपनी ओर खींचा था। आयोग ने इस बार के चुनाव में इन्हीं क्षेत्रों में मताधिकार जागरूकता अभियान का ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया है। मैसूरु जिले में २४.३२ लाख मतदाता मौजूद हैं। यह पिछले चुनाव की अपेक्षा १२ प्रतिशत अधिक है। चुनाव आयोग के सिस्टेमैटिक वोटर एजुकेशन एंड इलेक्टोरल पार्टिसिपेशन (स्वीप) अभियान के तहत कार्यकर्ता पूरे जिले के मतदाताओं के घर-घर जाकर उन्हें मतदान का महत्व बता रहे हैं और लोगों से अनिवार्य रूप से मतदान करने की अपील कर रहे हैं। जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) शिवशंकर यहां स्वीप के तहत चलने वाली गतिविधियों के प्रमुख हैं। उन्होंने बताया कि पूरे राज्य में मतदाताओं के बीच किए गए एक सर्वेक्षण में मैसूरु क्षेत्र के वोटरों से मतदान के बारे में उनकी राय जानने की कोशिश की गई। वोटिंग के बारे में इनकी जागरूकता की जांच की गई। इस सर्वेक्षण से पता चला कि मतदान प्रक्रिया के बारे में कम जानकारी होने की वजह से यह वोटर्स चुनाव के दिन अपने बूथों तक पहुंचने से कतराते हैं। शिवशंकर ने बताया, ’’इस सर्वेक्षण के आधार पर हमने स्वीप के तहत मतदान प्रतिशतता ब़ढाने के लिए कई कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की है। इनमें वोटर्स स्लिप बांटने, मतदान केंद्रों पर लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने और जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं।’’

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