चेन्नई। सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए राज्य के रेत खदानों को बंद करने के आदेश पर रोक लगा दी। राज्य सरकार ने मद्रास उच्च न्यायालय के इस आदेश पर रोक लगाने की मांग के साथ सर्वोच्च न्यायालय में समीक्षा याचिका दायर की थी। राज्य सरकार के अधिवक्ता ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि राज्य में यदि रेत खदानों को पूरी तरह से बंद कर दिया जाता है तो इससे राज्य में निर्माण गतिविधियां प्रभावित होगी। इस बात को स्वीकार करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी।मद्रास उच्च न्यायालय के एक मंडल पीठ ने पिछले महीने गत वर्ष २९ नवम्बर को उच्च न्यायालय की एक एकल न्यायाधीश द्वारा दिए गए राज्य के रेत खदानों को पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने के आदेश को बरकरार रखा था और राज्य के सभी रेत खदानों को छह महीने के अंदर बंद करने और राज्य में कोई अन्य खदान नहीं शुरु करने का भी निर्देश दिया था। उच्च न्यायालय ने खदानों के कारण पर्यावरण को हो रहे नुकसान को ध्यान में रखते हुए यह आदेश दिया था। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश टी कल्याणसुंदरम और टी कृष्णावल्ली की सदस्यता वाली मंडल पीठ ने राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ के न्यायाधीश आर महादेवन के आदेश को चुनौते देते हुए दायर की गई अपील याचिका खारिज कर दी थी। ज्ञातव्य है कि मद्रास उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने अपने आदेश में सरकार को धीरे-धीरे राज्य में सभी रेत खदानों को बंद करने और उसके बाद राज्य में पूर्ण रुप से रेत खनन पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया था। एकल पीठ ने सरकार को राज्य में ग्रेनाइट एवं अन्य खनिजों के खनन पर भी प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया था। राज्य में रेत की कमी को पूरा करने के लिए उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को विदेशी नदियों के रेत को आयात करने और राज्य में इस प्रकार से आयातित रेत की बिक्री को अनुमति देने का सुझाव दिया था। न्यायालय ने यहां तक कहा था कि पर्यावरण को हो रहे नुकसान को बचाने के लिए राज्य सरकार स्वयंद भी विदेश से रेत आयात कर उसे यहां बेच सकती है। न्यायालय द्वारा सरकार को रेत खदानों में अवैध ढंग से हो रही खनन गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विभिन्न खदानों के निकट सीसीटीवी कैमरे लगाने और अवैध ढंग से रेत ढोने वाले ट्रकों पर कार्रवाई करने के लिए विभिन्न स्थानों पर चेकपोस्ट बनाने का भी निर्देश दिया गया था। न्यायालय ने कहा था कि अगर इस नियम को लागू करने में सरकारी अधिकारियों द्वारा कोई कोताही बरती जाती है तो उन अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सोमवार को उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने वाले इस आदेश पर राज्य मंंे निर्माण गतिविधियों से जु़डे व्यापारियों ने प्रसन्नता प्रकट की है। इसके साथ ही रेत ढोने वाले ट्रकों के मालिकों ने भी सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश का स्वागत किया है। उच्च न्यायालय के इस आदेश के बाद से रेत पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होेने के कारण दूसरे राज्यों से रेत राज्य में लाया जा रहा था जिससे रेत की कीमत बढ गई थी। रेत खदानों के बंद होने के कारण नियमित तौर पर रेत खदानों से राज्य में विभिन्न स्थानों पर रेत पहुंचाने वाले ट्रक संचालकों को भी परेशानियों का सामना करना प़ड रहा था।

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