चेन्नई/दक्षिण भारत तमिलनाडु सरकार ने जैविक रूप से नष्ट नहीं होने वाले पॉलीथीन बैग सहित मंगलवार को प्लास्टिक की चीजों के इस्तेमाल पर जनवरी २०१९ से प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। राज्य सरकार ने पर्यावरण के हित में और भावी पी़ढी को प्लास्टिक मुक्त राज्य का तोहफा देने के लिए यह कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ईके पलानीस्वामी ने मंगलवार को विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर विधानसभा नियम ११० के तहत यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि यदि राज्य को पूर्णतया प्लास्टिक से मुक्त कर दिया जाता है तो इससे न सिर्फ हम पर्यावरण में प्रदूषण को कम करने में सफल होंगे बल्कि कई अन्य समस्याओं से भी बच पाएंगे।पलानीस्वामी ने कहा कि दिवंगत मुख्यमंत्री जे जयललिता ने इस मुद्दे पर एक विशेषज्ञ पैनल का गठन किया था, जिसने सुझाव दिया था कि प्लास्टिक की थैली, प्लेट और कप समेत प्लास्टिक के अन्य उत्पादों पर भी प्रतिबंध लगा दिया जाए। इसने सिफारिश की थी कि पारपंरिक चीजें, जैसे ता़ड के पत्तों से बनी प्लेट और केले के पत्ते का इस्तेमाल किया जाए। पलानीस्वामी ने कहा कि दूध, दही, तेल, और चिकित्सीय उत्पादों को पैक करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले प्लास्टिक इसके दायरे से बाहर होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम १९८६ के तहत यह प्रतिबंध लगाया गया है और यह एक जनवरी २०१९ से प्रभावी होगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि जैविक रूप से नष्ट नहीं होने वाले प्लास्टिक उत्पाद, जैसे कि पॉलीथीन पर्यावरण को प्रभावित करते हैं और पानी के बहाव को रोकते हैं। उन्होंने कहा कि इन्हें जलाने से समस्या पैदा होती है। प्लास्टिक उत्पाद से वायु, जल और भूमि प्रदूषण ब़ढता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदूषण फैलाने के साथ ही पॉलीथीन के कारण अन्य कई तरह की समस्याएं भी होती हैं। प्लास्टिक की थैलियों में जमा होने वाला पानी मच्छरों के प्रजनन का स्थान बनता है जिससे कई प्रकार की बीमारियां होती हैं। प्लास्टिक को जलाने से वायु प्रदूषण होता है और धोखे से इन्हें खाने वाले जानवरों की भी मौत हो जाती है।उन्होंने कहा कि इस नियम को राज्य भर में लागू करने के लिए राज्य के दुकानदार और आम नागरिक प्लास्टिक की थैलियों का उपयोग करना बंद कर दें और प्लास्टिक की थैलियों के बदले कप़डे और कागज से बनी थैलियों का उपयोग करें। उन्होंने कहा कि इसके लिए जनवरी २०१९ तक का समय इसलिए दिया जा रहा है कि इस अवधि में लोग प्लास्टिक की थैलियों का उपयोग करना बंद करके ऐसी वस्तुओं से निर्मित थैलियों का उपयोग करने के अभ्यस्त हो जाएं जो आसानी से नष्ट हो जाते हैं और जिनसे पार्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचता हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं राज्य के लोगों से अनुरोध करता हूं कि वह राज्य को प्लास्टिक मुक्त बनाने में सरकार की मदद करें।ज्ञातव्य है कि राज्य में ९० माइक्रोन से अधिक मोटाई वाली प्लास्टिक की थैलियों का उपयोग करना पहले से ही प्रतिबंधित है। इसके साथ ही राज्य हिन्दू धर्म और धमार्थ दान विभाग द्वारा राज्य के सभी मंदिरों में प्लास्टिक की थैलियों का उपयोग करने पर प्रतिबंध पहले से ही प्रभावी है। अब राज्य सरकार द्वारा राज्य को पूर्ण रुप से प्लास्टिक से मुक्त करवाने की दिशा में यह कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार राज्य के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए लगातार कदम उठा रही है और मौजूदा सरकार के कार्यकाल के दौरान उच्च शिक्षा के लिए सर्वाधिक राशि आवंटित की गई है।

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