बेंगलूरु। पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी सांसद एम वीरप्पा मोइली के नाम से ट्विटर पर जारी एक पोस्ट ने पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी। मोइली ने बाद में इस प्रकार का कोई ट्वीट करने से इन्कार कर दिया। इस विवादित ट्वीट में कहा गया था, ’’कांग्रेस को राजनीति में धनबलियों से छुटकारा पाने की जरूरत है। पार्टी के लिए जरूरी नहीं है कि कोई स़डक ठेकेदार पीडब्ल्यूडी मंत्री की सांठ-गांठ से बताए कि विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों का चयन किस प्रकार किया जाए।’’ इस ट्वीट ने राजनीतिक बर्रे के छत्ते पर पत्थर मारने का काम किया। पूरे एक दिन तक इस ट्वीट की चर्चा रही, जिसकी जानकारी मिलने के बाद मोइली ने इस ट्वीट से अपना कोई वास्ता न होने का दावा किया और इसे अपने ट्विटर हैंडल से हटा दिया। उन्होंने अपने ट्विटर खाते पर दी गई इस टिप्पणी पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा, ’’यह एक अनधिकृत पोस्ट थी। मैं किसी सार्वजनिक मंच पर अपनी ही पार्टी के खिलाफ किसी हालत में ऐसी बात न तो कह सकता हूं और न ही लिख सकता हूं्। मैं इस ट्वीट की तह तक पहुंचने की कोशिश करूंगा।’’ उधर, मोइली के कथित ट्वीट से भाजपा को कांग्रेस पर हमला बोलने का अच्छा मौका हाथ लग गया। भाजपा पहले से सत्तासीन कांग्रेस द्वारा राजनीति में धनबल के दुरुपयोग का तीव्र विरोध करती रही थी। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बीएस येड्डीयुरप्पा ने वीरप्पा मोइली के ट्वीट पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा, ’’कम-से-कम कोई तो है, जिसकी अंतरात्मा ने उसे आवाज उठाने को बाध्य किया! मोइली जी सही कह रहे हैं्। हम पहले से कहते रहे हैं कि सिद्दरामैया १० प्रतिशत वाले मुख्यमंत्री हैं। स़डक बनाने वाले ठेकेदार पीडब्ल्यूडी मंत्री की गहरी जेबें भर रहे हैं, जबकि राजकीय खजाना और स़डकों की बुरी हालत है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के विचारों से हमारे आरोप सही साबित हुए हैं।’’

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