चेन्नई। पिछले सप्ताह कन्याकुमारी में आए चक्रवाती तूफान ओखी के दौरान लापता हुए ६५ मछुआरों और २० नौकाओं को बचाकर वापस समुद्र तट पर लाने के लिए राज्य सरकार ने एक उप कलेक्टर की अगुवाई में विशेष टीम का गठन किया है। राज्य के मत्स्य मंत्री डी जयकुमार ने बुधवार को यहां पत्रकारों से बातचीत में इस बात की जानकारी दी। डी जयकुमार ने कहा कि ओखी चक्रवात से पहले समुद्र में मछली पक़डने के लिए उतरे राज्य के सभी १०६६ मछुआरे सुरक्षित हैं और उन्हें लक्षद्वीप, केरल और कर्नाटक के समुद्री तटों से राज्य में जल्द ही बचाव टीम द्वारा वापस लाया जाएगा।ओखी चक्रवात के दौरान लापता हुए राज्य के मछुआरों को बचाने का अभियान बुधवार को भी जारी रहा और ऐसे में मत्स्य मंत्री का यह बयान राज्य के मछुआरों के परिजनों के लिए राहत देने वाला है। मछुआरा समुदाय के लोगों के अनुसार ओखी चक्रवात से पहले राज्य के लगभग १००० मछुआरे समुद्र में मछली पक़डने के लिए उतरे थे। कहा जा रहा है कि कुछ मछुआरों का शव बीच समुद्र में तैरता दिखाई दे रहा है। मछुआरे चक्रवात के बाद से ही लगातार लापता मछुआरांे को ढूंढने की मांग कर रहे हैं।जयकुमार ने कहा कि जिन मछुआरों को समुद्र के बारे में अच्छा अनुभव है वह यदि बचाव अभियान में योगदान देना चाहते हैं तो वह आगे आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो मछुआरे समुद्र में फंसे मछुआरों की मदद करने के लिए तैयार हैं सरकार उनकी मशीनीकृत नौकाओं के डीजल के खर्च और उनके आने जाने के शुल्क का भुगतान करेगी। उन्होंने कहा कि कुछ मछुआरों ने अपनी नौकाओं से ओखी चक्रवात के दौरान समुद्र में फंसे मछुआरों को बचाने में काफी मदद की है और सरकार की ओर से ऐसे मछुआरों को मदद की जाएगी।उन्होंने कहा कि गहरे समुद्र में मछली पक़डने वाले बहुत सारे मछुआरे अभी क्रिसमश तक समुद्र में ही रहेंगे और उसके बाद ही तटों पर लौटेंगे इन मछुआरों के लौटने के बाद ही इस बात का पता चल सकेगा कि ओखी चक्रवात के दौरान कितने मछुआरे सुरक्षित बचे हैं और कितनों की मौत हुई है। इसी क्रम में नौसेना, वायुसेना और भारतीय कोस्टगार्ड के जवानों द्वारा निरंतर बचाव अभियान चलाया जा रहा है। नौसेना के अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार नौसेना और भारतीय कोस्टगार्ड के जहाज समुद्री तट से १०० से १५० नॉटिकल मील की दूरी और आवश्यकता प़डने पर इससे भी अधिक दूरी तक खोज अभियान चला रहे हैं।रक्षा अधिकारियों की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार राज्य के ३४६ मछुआरों ने कर्नाटक के कारवा़र में शरण ली है और उनकी ३२ नौकाएं भी कारवार के तट पर हैं। कारवार के समुद्री तट पर मौजूदा समय में १,२४७ मछुआरे और उनकी १२९ नौकाएं ख़डी हैं। इन मछुआरों में तमिलनाडु के मछुआरों के साथ ही केरल, कर्नाटक और महाराष्ट्र के मछुआरे भी शामिल हैं। चक्रवात राज्य के मछुआरों की २५ नौकाओं को मेरिया बंदर, रत्नागिरि और देवगढ भी ले गया है। इसके साथ ही केरल के मछुआरों की ८० नौकाएं, कर्नाटक के मछुआरों की ४५ नौकाएं और गोवा के मछुआरों की १५ नौकाएं भी देवग़ढ, मेरिया बंदर और कारवार के तट पर सुरक्षित ले जाई गई हैं। रक्षा विभाग की ओर से जारी बयान के अनुसार कोस्टगार्ड के तीन जहाज और एक विमान कन्याकुमारी के समुदी तट के आसपास लगातार खोज अभियान में जुटे हैं।

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