चेन्नई। मद्रास उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान इस बात पर गौर करते हुए कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य की लगभग ५०,००० एक़ड जमीन पर अतिक्रमण कर लिया गया है, राज्य के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वह अवैध रूप से या पट्टे पर दी गई संपत्तियों को वापस लेनेे के लिए कदम उठाए। न्यायाधीश आर महादेवन ने हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ दान विभाग (एचआर और सीई) विभाग के अधिकारियों को मंदिरों को समुचित ढंग से प्रशासित करने का निर्देश दिया।उन्होंने एचआर और सीई के आयुक्त को निर्देश दिया कि वह ऐसी समितियों का गठन करेें जो राज्य के सभी मंदिरों का दौरा करें और उनकी जमीन से संबंधित मामलों और उनकी जमीन पर हुए अतिक्रमण को चिन्हित करें। आयुक्त को इस संबंध में छह सप्ताह के अंदर एक रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया जिसमें मंदिर की जमीन पर दिए गए पट्टे और उस पर हुए अतिक्रमण का सारा ब्यौरा हो। न्यायाधीश ने पिछले वर्ष ३० जून को शिवगंगा जिले के सहायक आयुक्त द्वारा एक मंदिर के ट्रस्टियों द्वारा मंदिर की जमीन को वापस प्राप्त करने के लिए आवेदन देने के बाद उन्हंे न्यायालय के पास जाने के लिए दिए गए आदेश को भी खारिज कर दिया।नागर सूराकुडी स्थित मंदिर के ट्रस्टियों द्वारा दायर की गई याचिका में जमीन संबंधी कुछ ऐसे दस्तावेज भी सौंपे गए थे जिनसे यह पता चलता था कि कुछ तीसरी पार्टियों द्वारा मंदिर की जमीन छीन ली गई। मंदिर की जमीन को मंदिर के ट्रस्टियों के साथ किए गए समझौते के दस्तावेजों के आधार पर मंदिर से छीन लिया गया था। न्यायालय ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस प्रकार की गतिविधि जहां कहीं भी हुई हो वहां पर मंदिर की जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाए।न्यायालय ने राज्य के राजस्व सचिव को निर्देश दिया कि वह सभी तहसीलदारों और जिला राजस्व अधिकारियों को निर्देश दें कि वह अवैध ढंग से निजी व्यक्तियों के नाम पर स्थानांतरित मंदिर की जमीन का पट्टा रद्द करें और मंदिर की जमीन पर मंदिर को कब्जा दिलवाने की दिशा में समुचित और ठोस कार्रवाई करें। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि जब तक एचआर एंड सीई विभाग की ओर से लिखित तौर पर किसी मंदिर की जमीन का पट्टा निजी व्यक्तियों को सौंपने के बारे में निर्देश नहीं दिया जए तब-तक वह किसी भी तीसरी पार्टी को जमीन का पट्टा न पंजीकृत करें।

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