चेन्नई। राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी द्रवि़ड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के कार्यकारी अध्यक्ष एमके स्टालिन ने शुक्रवार को कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री ईके पलानीस्वामी और उप मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम कावेरी मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश को पालन करवाने के लिए गंभीर नहीं है। उन्होंने यह बात गुरुवार को राज्य विधानसभा में बुलाई गई की विशेष सर्वदलीय बैठक में कावेरी मुद्दे पर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित होने के एक दिन बाद कही।स्टालिन ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा केन्द्र सरकार को छह सप्ताह के अंदर कावेरी प्रबंधन बोर्ड और कावेरी जल प्रबंधन नियामक समिति (सीडब्ल्यूएमआरसी) का गठन करने के लिए कहा था लेकिन केन्द्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार इसमें जानबूझकर देरी कर रही है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के इस टाल मटोल वाले रवैये के बावजूद पलानीस्वामी और पन्नीरसेल्वम केन्द्र सरकार पद अपनी मांगों को मनवाने के लिए दबाव बनाने में विफल हुए हैं। उन्होंने कहा कि इससे यह पता चलता है कि आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की अपने राज्य के प्रति जिस प्रकार की भावनाएं हैं अपने राज्य को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री में ऐसी भावना नहीं है।स्टालिन ने कहा कि यदि पूरा दक्षिण भारत अलग द्रवि़डनाडु की मांग करता है तो द्रमुक निश्चित तौर पर उनका समर्थन करेगी। उन्होंने कहा कि द्रवि़डनाडु के विचार को मूर्त रुप देने के लिए इसके लिए एक व्यापक आंदोलन चलाने की आवश्यकता है। यदि ऐसा होता है तो इससे प्रदेश का विकास काफी तेजी के साथ होगा। उन्होंने कहा कि यदि द्रवि़डनाडु का गठन होता है तो केन्द्र द्वारा राज्य के हितों की उपेक्षा करना कठिन होगा। स्टालिन ने कहा कि सीमएबी और सीडब्ल्यूएमआरसी के गठन के मुद्दे पर द्रमुक सत्तारुढ अन्नाद्रमुक का समर्थन के लिए तैयार हैं और इसमें सत्तारुढ पार्टी को जल्द से जल्द दिलचस्पी दिखाने की आवश्यकता है।केन्द्र सरकार द्वारा सर्वोच न्यायालय में सेतुसमुद्रम परियोजना को आगे नहीं बढाने की बात कहने पर द्रमुक ने कहा कि द्रमुक चाहती है कि इस परियोजना को नहीं रोका जाना चाहिए। यदि इस परियोजना को पूरा किया जाता है तो इससे तमिलनाडु का विकास होगा। नए जलमार्ग खुलने से दूसरे देशों से तमिलनाडु के समुद्री तट की दूरी कम हो जाएगी और राज्य से समुद्री रास्तों से होने वाले निर्यात में बढोत्तरी होगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि इस परियोजना को आगे नहीं बढाकर केन्द्र सरकार तमिलनाडु के साथ भेदभाव कर रही है। उन्होंने कहा कि यह केवल इकलौता उदाहरण नहीं है राज्य के लिए लाभदाय साबित होने वाली कई परियोजनाओं को शुरु करने में केन्द्र सरकार द्वारा विलंब किया जाता है।

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