बेंगलूरु। विधानसभा चुनाव के पूर्व जहां सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी दल भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बीच जुबानी जंग चल रही है और दोनों दलों के शीर्ष नेता राज्य का दौरा कर रहे हैं वहीं चुनाव के बाद ‘किंग मेकर’’ बनने की भूमिका की आस लगाए जनता दल (एस) का नेतृत्व विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर पारिवारिक उलझन में उलझा दिख रहा है। टिकट बंटवारे को लेकर परिवार में मची खींचतान के बीच पार्टी सुप्रीमो और पूर्व प्रधानमंत्री ८५ वर्षीय एचडी देवेगौ़डा परिवार के सदस्यों के बीच बैलेंस बनाने की जुगत में लगे दिख रहे हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं को भी खुश करने की कोशिश में हैं। दरअसल देवेगौ़डा के चार बेटों में दो एचडी कुमारस्वामी और एचडी रेवन्ना राजनीति में सक्रिय हैं। कुमारस्वामी जहां पूर्व में मुख्यमंत्री रह चुके हैं और इस बार भी पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं, वहीं रेवन्ना मंत्री रह चुके हैं और हासन जिला सहित दक्षिण कर्नाटक में पार्टी की बागडोर भी संभाले रहते हैं। कुमारस्वामी की पत्नी अनिता एक बार विधायक रह चुकी हैं जबकि रेवन्ना की पत्नी भवानी जिला पंचायत सदस्य हैं और इस बार विधानसभा में जाने की चाहत रखती हैं। इसके अतिरिक्त रेवन्ना और भवानी के २७ वर्षीय पुत्र प्रजवाल भी इस बार विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाना चाहते हैं। हालांकि राजनीतिक गलियारों में माना जाता है कि कुमारस्वामी नहीं चाहते हैं प्रजवाल को टिकट मिले जिस कारण परिवार में मतभेद भी है। कांग्रेस और भाजपा पहले से ही जनता दल (एस) को बाप-बेटे की पार्टी कहती रही है इसलिए ऐसे में अगर प्रजवाल को टिकट मिलता है तो देवेगौ़डा की तीसरी पीढी के मैदान में उतरने पर विरोधी दल और ज्यादा मुखरता से देवेगौ़डा की पार्टी का विरोध करेंगे। इसके अतिरिक्त कई पार्टी कार्यकर्ता भी पार्टी मंे परिवारवाद बढने के विरोध में हैं। इसलिए देवेगौ़डा ने कहा है कि सिर्फ कुमारस्वामी और रेवन्ना ही विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार होंगे। हालांकि देवगौ़डा के इस निर्णय से उलट प्रजवाल ने असंतोष रुख अख्तियार करते हुए टिकट के लिए दावा ठोका है और वे बेलूर विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवारी चाहते हैं। वहीं हाल ही में प्रजवाल को पार्टी का राज्य महासचिव बनाया गया जिसके बाद उनकी टिकट की दावेदारी की संभावनाएं भी एक बार फिर बढ गई। झ्यद्यप्य्द्य ·र्ष्ठैं फ्ख्रडद्भ ब्र्‍ द्मब्र्‍्र फ्ख्ष्ठ फ्ैंद्धैंथ्र्‍ द्नर्‍ ्यप्थ्य्द्भ·र्ैं ब्स्रराजनीतिक पंडितों की मानें तो प्रजवाल के पार्टी में बढते कद के कारण अनिता कुमारस्वामी नाखुश हैं और अगर पार्टी ने प्रजवाल को चुनाव में उम्मीदवार बनाया तो अनिता भी चन्नपटना विधानसभा चुनाव ल़डेंगी। इतना ही नहीं, देवेगौ़डा परिवार के कुछ अन्य सदस्य और संबंधी भी टिकट के लिए कतार में हैं। देवेगौ़डा के बेटे डॉ रमेश के ससुर डीसी तम्मन्ना इस समय मद्दूर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और इस बार भी टिकट चाहते हैं। देवेगौ़डा के दामाद और प्रख्यात कार्डियोलॉजिस्ट डॉ सीएन मंजुनाथ के भाई बालकृष्ण भी हासन जिले के श्रवणबेलगोला से विधायक हैं और फिर से चुनाव में उतरने को तैयार हैं। इसी प्रकार देवेगौ़डा के एक और बेटे और सेवानिवृत नौकरशाह एचडी बालकृष्णेगौ़डा की बेटी के ससुर तथा मैसूरु विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ एचसी रंगप्पा को भी मैसूरु में चामराजा विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाने की घोषणा की गई है। ्य·र्ैंत्रद्मय् द्धढ्ढणय्ॅैंख्ष्ठ झ्यद्यप्य्द्यप्य्ख्र?देवेगौ़डा परिवार पर नजर रखने वाले राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो मौजूदा समय में देेवेगौ़डा परिवार और सगे संबंधियों में करीब आधा दर्जन लोग सांसद, विधायक और अन्य निर्वाचित पदों पर हैं। इस बार के विधानसभा चुनाव में ऐसा लग रहा है कि इस संख्या में और ज्यादा बढोत्तरी होगी। एक प्रकार से टिकट पाने की खींचतान में लगे देवेगौ़डा परिवार के लोग विधानसभा चुनाव जीतने के पूर्व पहले परिवार में टिकट हासिल करने की जीत में लगे हैं और अगर यह संख्या बढी तो राजनीति में परिवारवाद को बढावा देने में देवेगौ़डा अहम भूमिका निभा लेंगे।

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