चेन्नई। अखिल भारतीय अन्ना द्रवि़ड मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के वरिष्ठ नेता और तमिलनाडु विधानसभा के उपाध्यक्ष वी जयरमण ने सुझाव दिया है कि राज्य में कन्या भ्रूण-हत्या की रोकथाम के लिये दिवंगत मुख्यमंत्री जे जयललिता की योजना के आलोक में उनके नाम की सिफारिश नोबेल पुरस्कार के लिए की जानी चाहिए। वी जयरामण ने विधानसभा में अपनी बात रखते हुए यह कहा। अन्नाद्रमुक की पूर्व सुप्रीमो तथा राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता द्वारा वर्ष १९९२ में बतौर मुख्यमंत्री शुरू की गई क्रैडल बेबी योजना’’ का जिक्र करते हुए जयरमण ने कहा कि इस पहल की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता दिवंगत मदर टेरेसा ने प्रशंसा की थी। उन्होंने कहा कि यह योजना शुरू में सेलम में शुरू की गई थी और बाद में चरणबद्ध तरीके से यह पूरे राज्य में लागू की गई जिसके परिणामस्वरुप लिंगानुपात बेहतर हुआ। बतौर मुख्यमंत्री (१९९१-९६) जयललिता के पहले कार्यकाल में शुरू की गई इस योजना में महिलाओं को अपने नवजात शिशु को गोपनीय ढंग से सरकार को सौंपने की इजाजत थी, सरकार शिशु की देखभाल करती थी। यह कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए शुरू की गई थी जो उस समय राज्य के कुछ हिस्सों में काफी प्रचलित थी। उन्होंने कहा कि इस योजनला के तहत अभी तक राज्य के हजारों परित्यक्त बच्चों और आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग की बच्चियों का भरण पोषण सरकार द्वारा किया गया है। जयरमण ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ने न सिर्फ कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम के लिए कदम उठाए बल्कि उन्होंने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं और पति के साथ वैवाहिक रिश्ते समाप्त होने के बाद अकेले जीवन यापन कर रही महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में भी कदम उठाए। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को सरकार की ओर से नि:शुल्क बकरियां और दुधारु गाय देने की योजना से राज्य के ग्रामीण इलाकों में रहने वाली महिलाएं आर्थिक रुप से मजबूत हुई। उन्होंने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री की ओर से अकेली रहने वाली महिलाओं के लिए सिलाई मशीन एवं अन्य उपकरण देकर उनके जीवनशैली में सुधार लाने का प्रयास भी किया गया। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री के अभिनव प्रयोगों से न सिर्फ तमिलनाडु की जनता लाभन्वित हुई बल्कि देश के कई राज्यों ने राज्य में उनके नेतृत्व वाली सरकार की योजनाओं का अनुसरण किया।

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