चेन्नई। शुक्रवार को ६९वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर चालू हालत में दुनिया के सबसे पुराने स्टीम इंजन ’’ईआईआर-२१’’ का विरासत परिचालन किया गया। इस ऐतिहासिक स्टीम इंजन को चेन्नई एग्मोर से कोडमबाक्कम स्टेशन के बीच परिचालित किया गया। एक डिब्बे के साथ यह इंजन शुक्रवार को १२.०० बजे चेन्नई एग्मोर स्टेशन से रवाना हुआ। इसे देखने के लिए एग्मोर स्टेशन से कोडमबाक्कम स्टेशन के साथ ही उन स्टेशनों पर काफी संख्या में लोग एकत्रित हुए थे जिन स्टेशनों से होकर यह गुजरने वाला था।दक्षिण रेलवे के महाप्रबंधक आरके कुलश्रेष्ठ, दक्षिण रेलवे के प्रधान मुख्य अभियांत्रिकी अभियंता एके काठपाल तथा दक्षिण रेलवे मंडल के मंडल रेल प्रबंधक नवीन गुलाटी तथा दक्षिण रेलवे के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। ज्ञातव्य है कि अब तक इस ऐतिहासिक इंजन का सात बार विरासत परिचालन किया जा चुका है। दक्षिण रेलवे द्वारा इस इंजन का प्रथम विरासत परिचालन १५ अगस्त २०१० को चेन्नई सेंट्रल से आवडी के बीच किया गया था। दूसरी बार इसका विरासत परिचालन १५ अगस्त २०११ को चेन्नई एग्मोर से गिंडी के बीच किया गया। तीसरा विरासत परिचालन२६ जनवरी २०१२ को चेन्नई एग्मोर से गिंडी के बीच, चौथा विरासत परिचालन ०६ फरवरी २०१२ को चेन्नई सेंट्रल से पेरम्बूर तक, पांचवा विरासत परिचालन २६ जनवरी २०१३ को चेन्नई एग्मोर से गिंडी के बीच, छठा विरासत परिचालन १० सितम्बर २०१७ को चेन्नई एग्मोर से कोडमबाक्कम और सातवां विरासत परिचालन गत शुक्रवार को यानी की २६ जनवरी २०१८ को चेन्नई एग्मोर से कोडमबाक्कम के बीच किया गया। लोको वर्क्स, पेरम्बुर ने वर्ष २०१० में १६३ वर्षीय स्टीम लोको ’’एक्सप्रेस ईआईआर २१’’ को पुनर्जीवित करने की चुनौती स्वीकार की। वर्ष १९०९ में इस इंजन को सेवा से वापस लेने के बाद लगभग १०१ वर्षों तक जमालपुर कार्यशालाओं और हाव़डा स्टेशन पर प्रदर्शित किया गया। इस अवधि के दौरान इसने लगातार धूप और बारिश का सामना किया। इतने लंबे समय तक खुले आसमान के नीचे रहने के कारण इसके कई हिस्सों मंे जंग लग गए थे तो कुछ गायब हो गए थे और कुछ टूट गए थे। इसके साथ ही इसके कुछ औजार ऐसी स्थिति में पहुंच गए थे जिनका उपयोग नहीं किया जा सकता था। इस इंजन को नया जीवन देने के बाद वर्ष २०१० के स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर इसे चेन्नई सेंट्रल से आवडी के बीच परिचालित किया गया।

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