चामुंडेश्वरी हिल्स/दक्षिण भारतमहलों के शहर मैसूरु स्थित देवी दुर्गा के अपने घर पर कर्नाटक मुख्यमंत्री और पूर्व में उनके खासम-खास मित्र समझे जाने वाले जनता दल (एस) प्रत्याशी जीटी देवेगौ़डा के बीच १२ मई के चुनाव के लिए बेहद करीबी टक्कर होने जा रही है। यह टक्कर बेहद दिलचस्प भी रहेगी। सिद्दरामैया अपने राजनीतिक और चुनावी सफर के दौरान आठवीं बार इस सीट पर प्रत्याशी के रूप में किस्मत आजमा रहे हैं। इस सीट पर उन्हें पांच बार जीत मिली है। इस बार के चुनाव में वह चामुंडेश्वरी के अलावा बादामी सीट से भी चुनाव ल़ड रहे हैं। हालांकि चामुंडेश्वरी पहा़डी को चामुंडेश्वरी सीट की राजनीति का केंद्र माना जाता है लेकिन यहां के २०० परिवारों के पंजीकृत मतदाता अब तक यह निर्णय नहीं ले सके हैं कि वह मतदान के दिन किस नाम पर अपनी मुहर लगाएंगे। ·र्ैंय्ैंख्श्नष्ठफ्-ज्द्मत्रय् ख्रध् (ॅफ्) ·र्ष्ठैं द्धर्‍घ् ·र्ैंय्ैंट्टष्ठ ·र्ैंर्‍ ट्टर्झैंद्यकई गांवों और कस्बों को मिलाकर बने चामुंडेश्वरी विधानसभा क्षेत्र के साथ ही मैसूरु जिले में ११ विधानसभा सीटें मौजूद हैं। वहीं, चामुंडी हिल्स पर रहनेवाले लोगों का मानना है कि इस बार मैदान में उतरे भाजपा और जनता दल (एस) प्रत्याशियों की जीत की संभावनाएं लगभग बराबर हैं। वहीं, भाजपा तीसरे स्थान पर रहने के बावजूद इन दोनों पार्टियों से मीलों पीछे रहेगी। चामुंडेश्वरी मंदिर के पास ही एक बेकरी चलाने वाले माधव का कहना है कि इस बार निश्चित रूप से कांग्रेस और जनता दल (एस) के बीच कांटे की टक्कर होने जा रही है। उन्होंने कहा, ’’सिद्दरामैया यहां एक मजबूत उम्मीदवार हैं। विधानसभा में वह इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और अब वह यहीं लौटकर जनता का समर्थन मांगने आए हैं। हम नहीं कह सकते कि इस बार के चुनाव में जीत किसे मिलने जा रही है। वास्तव में यहां की जनता दोनों प्रत्याशियों को पसंद करती है। हो सकता है कि मतदान के दिन लोग पार्टी की विचारधारा से अधिक इन प्रत्याशियों के व्यक्तिगत गुण-दोष के आधार पर अपना वोट दें।’’ घ्य्द्बरुैंठ्ठष्ठप्रप्द्यर्‍ द्बष्ठ्र ज्द्मत्रय् ख्रध्-ॅफ् द्बज्द्धरूत्र ्यडत्र्यत्र द्बष्ठ्रमाना जा रहा है कि इस सीट पर जो बात जनता दल (एस) के प्रत्याशी जीटी देवेगौ़डा के लिए सहूलियत भरी है वह यह कि चामुंडेश्वरी में वोक्कलिगा समुदाय के मतदाता बहुसंख्यक हैं। लोगों को पता है कि सिद्दरामैया राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री हैं और मतदाता इस तथ्य की अनदेखी नहीं कर सकते। इसके बावजूद चामुंडेश्वरी में जनता दल (एस) काफी मजबूत है। यहां वोक्कलिगा समुदाय के लगभग ७० हजार मतदाता हैं, जो पारंपरिक रूप से पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौ़डा की अगुवाई वाले जनता दल (एस) का समर्थन करते आए हैं। यहां के प्रत्याशी जीटी देवेगौ़डा के लिए यह काफी सुकून की बात है। बहरहाल, वर्ष २००६ का उप चुनाव सिद्दरामैया ने मात्र २५७ मतों के फासले से चुनाव जीता था। माना जाता है कि उप चुनाव में जीटी देवेगौ़डा ने ही सिद्दरामैया को अपना ठोस समर्थन देकर जीत हासिल करने में मदद की थी। वहीं, बाद में वह कई बार दल बदलकर दोबारा अपनी मूल पार्टी जनता दल (एस) में लौट आए हैं और सिद्दरामैया को उनकी चुनौती मिल रही है।द्बह्रज्रूख्रय् ्यप्थ्य्द्भ·र्ैं फ्ष्ठ क्वरुप्रय् द्मब्र्‍्र द्बत्रख्रय्त्रय्बहरहाल, स्थानीय माहौल की बात करें तो इस सीट पर फिलहाल व्यापक विधायक विरोधी लहर देखने को मिल रही है। इस सीट के मौजूदा विधायक से लोग खुश नहीं हैं। एक स्थानीय टैक्सी चालक अप्पाजी ने कहा, ’’यहां हमें पीने के पानी का संकट झेलना प़ड रहा है और विधायक इस समस्या से निजात दिलाने के लिए हमारी कोई मदद नहीं कर सके। हमें लगता है कि सिद्दरामैया हमारी मदद कर सकते हैं। अगर कांग्रेस चुनाव जीतती है तो उनका दोबारा मुख्यमंत्री बनना तय है।’’ इस नजरिए से यहां के काफी लोग सहमत भी हैं। इसके बावजूद सिद्दरामैया के लिए चिंता की बात यह है कि वर्ष २००८ में हुए विधानसभा सीट पुनर्सीमांकन के बाद चामुंडेश्वरी सीट का भूगोल काफी बदल गया है। इसके साथ ही यहां के जातीय समीकरण में भी बदलाव हुआ है। इस सीट के जिन क्षेत्रों में सिद्दरामैया की अपनी कुरुबा जाति के मतदाताओं की अधिकता थी, वह प़डोस की वरुणा सीट में चले गए हैं। चामुंडेश्वरी के २.७८ लाख मतदाताओं में से सिद्दरामैया को लगातार समर्थन देने वाले दलितों, मुस्लिमों और अन्य पिछ़डा वर्ग (अहिंदा) के मतदाताओं की संख्या अब १.२५ लाख रह गई है। इस बार यही मतदाता सिद्दरामैया की चुनावी किस्मत तय करेंगे। साथ ही कांग्रेस को यह उम्मीद भी नजर आती है कि पारंपरिक रूप से भाजपा का समर्थन करने वाले लिंगायत समुदाय के मतदाता भी इस बार कांग्रेस को अपना पूर्ण समर्थन दे सकते हैं।

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