वामपंथी नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि मैं यहां भारतीय लोकतंत्र के एक सक्रिय सैनिक के रूप में भारत के बहुलतावाद के विचार के साथ शामिल हूं। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान विविधता में एकता और सहिष्णुता की रही है। यह तभी हो सकता है जब गोलियों के बिना चर्चा और बहस का अवसर मिले। उन्होंने कहा कि विचारधारा की ल़डाई ही भारत का विचार है लेकिन अगर हमारे भारत में विचारधारा को गोलियांे से मारा जाता है, वह विचार हमारे भारत का नहीं हो सकता है। गौरी लंकेश की हत्या को अफसोसजनक करार देते हुए येचुरी ने कहा कि देश ने एक ऐसे व्यक्ति को खो दिया जो मौखिक रूप से असहमत थी लेकिन उनकी हत्या के बाद भी उनकी भागीदारी को समाप्त नहीं किया जा सकता है क्योंकि उनके विचारों को कभी समाप्त नहीं किया जा सकता है। येचुरी ने बिना किसी का नाम लिए हुए कहा कि गौरी के साथ जो हुआ है वह अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि आज हजारों की संख्या में समान विचारधारा के लोग यहां एकत्रित हुए हैं क्योंकि अब हम यह महसूस कर रहे हैं कि हम एक ऐसे आंदोलन के रास्ते पर हैं जिसमें प्राधिकारी और सत्ता द्वारा अधिनायकवादी राज्य पैदा किया जा रहा है जो यह भारत की विचारधारा के विपरीत है।

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