चेन्नई। एक शोधार्थी ने मद्रास उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर अनुरोध किया था कि राज्य सरकार और केन्द्र सरकार को भारतीय नोटों पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम से ‘महात्मा’’ शब्द को हटाने का निर्देश दिया जाए। मद्रास उच्च न्यायालय के समक्ष सोमवार को यह याचिका सुनवाई के लिए आई। इस याचिका के समक्ष आते ही उच्च न्यायालय ने इसे खारिज कर दिया और अदालत का समय बर्बाद करने के लिए याचिकाकर्ता एस मुरुगानतम पर १० हजार रुपए का जुर्माना लगा दिया।एस मुरुगानतम कोलकाता के जाधवपुर विश्वविद्यालय में एक शोध विद्यार्थी हैं। उनकी ओर से दायर की गई याचिका सुनवाई के लिए सामने आते ही मद्रास उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश इंदिरा बनर्जी और न्यायाधीश एम सुंदर की सदस्यता वाली पीठ ने कहा कि इस प्रकार की याचिकाएं सिर्फ अदालत का समय बर्बाद करने और सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के उद्देश्य से दायर की जाती हैंै। याचिकाकर्ता ने याचिका में कहा था कि सरकार द्वारा भारतीय नोटों पर मोहनदास करमचंद गांधी के नाम के आगे ‘महात्मा’’ शब्द का उपयोग करना संविधान की धारा १४ और १८ का उल्लंघन है। इसके साथ ही जब भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा इस शब्द का उपयोग किया जाता है तो यह समानता के सिद्धांत के खिलाफ है जोकि संविधान द्वारा प्रदत मौलिक अधिकार है। इस याचिका को खारिज करते हुए न्यायालय ने कहा कि महात्मा गांधी देश के राष्ट्रपिता हैं और उन्हें इस नाम से न सिर्फ अपने देश में बल्कि दुनिया के अन्य देशों में भी उनके द्वारा भारतीय लोकतंत्र के लिए दिए गए योगदान के लिए सम्मान पूर्वक बुलाया जाता है। इसलिए इस प्रकार की याचिका स्वीकार करने योग्य नहीं है।

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