बेंगलूरु। भाजपा की परिवर्तन यात्रा और जनता दल (एस) की विकास यात्रा के बाद अब सत्ताधारी कांग्रेस अगले वर्ष १ मार्च से राज्य में जनादेश यात्रा निकालेगी जिसकी अगुवाई मुख्यमंत्री सिद्दरामैया करेंगे। यहां संवाददाताओं से बात करते हुए सिद्दरामैया ने कहा कि वे एक मार्च २०१८ से शुरु होने वाली जनादेश यात्रा का नेतृत्व करेंगे। उन्हांेने कहा कि इसके अतिरिक्त राज्य सरकार पूरे राज्य में साधना संभ्रमा समावेश (उपलब्धियों पर सम्मेलन) का आयोजन करेगी जिसके द्वारा राज्य की जनता को उन लोकप्रिय योजनओं और कार्यक्रमों के बारे में जागरुक किया जाएगा जिसे वर्ष-२०१३ में सत्ता में आने के बाद कांग्रेस सरकार शुरु किया है। उन्होंने कहा कि परिवर्तन यात्रा का आयोजन प्रदेश कांग्रेस कमेटी करेगी जबकि साधना संभ्रमा समावेश सरकार का आयोजन होगा और इस दौरान विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में कई विकास योजनाओं से संबंधित नींव भी रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव के सी वेणुगोपाल, जो राज्य में पार्टी मामलों के प्रभारी भी हैं, ने पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवारों की हार के कारणों का अध्ययन करने और बूथ स्तर से पार्टी को मजबूत करने के लिए कदम उठाए हैं। इसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जी. परमेश्वर, कार्यकारी अध्यक्ष एसआर पाटिल और दिनेश गुंडूराव, पार्टी प्रचार समिति के अध्यक्ष डीके शिवकुमार सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं का सहयोग मिला है। उन्होंने कहा कि साधना समावेश का शुभारंभ १३ दिसम्बर को कुडल संगमा में होगा जिसके बाद बागलकोट, विजयापुरा, बेलगावी, हावेरी, गदग, दावणगेरे, चित्रदुर्गा, टुमकूरु, चिकमगलूरु, दक्षिण कन्ऩड, उडुपी, चामराजनगर और मैसूरु जिलों में कार्यक्रम होंगे। ख्रष्ठप्रय् ·र्ैंर्‍ ज्द्मत्रय् घ्य्ब्त्रर्‍ ब्स् द्यय्ब्रुय द्धद्मष्ठ्र ·र्ैंय्ैंख्श्नष्ठफ् ृक्द्भूय्सिद्दरामैया ने कहा है कि देश की जनता चाहती है कि राहुल गांधी कांग्रेस का नेतृत्व करें। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के अध्यक्ष पद संभालने के बाद इसका देश की राजनीति पर ब़डा असर होगा। हावेरी जाने के क्रम में हुब्बल्ली हवाई अड्डे पर संवाददाताओं से बात करते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के एआईसीसी अध्यक्ष बनने आप विपक्षी दलों के नेताओं से यह उम्मीद नहीं कर सकते हैं कि वे इसकी प्रशंसा करेंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के १३० साल के इतिहास में कई ऐसे नेता रहे जो नेहरू परिवार के सदस्य नहीं थे फिर भी वे पार्टी के अध्यक्ष बने।

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