इस्लामाबाद। पाकिस्तान के चुनाव नतीजों से पहले ही यह चर्चा हो रही थी कि इमरान ख़ान की तहरीक-ए-इंसाफ सबसे ज्यादा सीटें लेकर आएगी। इसके पीछे खासतौर से पाकिस्तानी फौज का हाथ बताया जा रहा था, वहीं पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के समर्थक कह रहे थे कि यह पूरा चुनाव ही धांधली पर आधारित है। बाद में चुनाव नतीजों भी इस बात पर मुहर लगा दी कि इमरान का पलड़ा भारी है। यह किस वजह से है, इसके ‘खुलासे’ में भी एक खास तरह का दावा किया जा रहा है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इमरान की जीत में 5 करोड़ मतदाताओं के डेटाबेस और एक खास फोन एप ने बड़ी भूमिका निभाई है। अगर उनके पास ये दो चीजें न होतीं तो तस्वीर कुछ और ही होती। इसके लिए इमरान की टीम ने बहुत व्यवस्थित रणनीति बनाई। डेटाबेस का इस्तेमाल किया। एप के जरिए पूरे पाकिस्तान में खूब प्रचार किया गया। इमरान ने उनसे ‘नया पाकिस्तान’ बनाने का वादा किया। चूंकि पाकिस्तान का क्षेत्रफल बहुत ज्यादा नहीं है। इसलिए मतदाताओं तक पहुंचने में भी उन्हें अधिक समय नहीं लगा।

इस एप की मदद से इमरान की टीम ने मतदाताओं से सीधे संपर्क किया। उनकी चुनाव रैलियों, स्थानीय मुद्दों को हवा दी, नवाज़-जरदारी के कथित भ्रष्टाचार को भुनाया और इस तरह पीटीआई चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। अब इमरान प्रधानमंत्री बनने के करीब हैं। उनकी इस जीत में तकनीकी का योजनाबद्ध ढंग से किया गया इस्तेमाल बहुत काम आया।

इमरान की टीम ने इस बात का खास ध्यान रखा कि दूसरे राजनीतिक दल, खासतौर से नवाज़ की पीएमएलएन इसका फायदा न उठा पाए। फोन एप के जरिए पीटीआई ने हर बूथ और मतदाताओं का विश्लेषण किया। दूसरे राजनीतिक दल ऐसा तरीका अपनाने में विफल रहे, जो इस प्रयोग को टक्कर दे सके। उनके प्रचार से लेकर जमीनी स्तर पर काफी खामियां थीं, जो इमरान के लिए वरदान साबित हुईं।

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