नरेंद्र मोदी को रोकने के लिए कांग्रेस उन दलों से भी हाथ मिलाने को तैयार है जिनके साथ अतीत में उसे मुकाबला करना पड़ा था।

नई दिल्ली। आगामी लोकसभा चुनावों में मोदी का विजयरथ रोकने के लिए विपक्ष एकजुट हो रहा है। हर प्रांत के लिए महागठबंधन की योजनाएं बनाई जा रही हैं। इस बीच चर्चा है कि कांग्रेस जिस तरह महागठबंधन का हिस्सा बनना चाहती है, वह बिना प्रधानमंत्री उम्मीदवार के ही चुनावों में उतरेगी। कांग्रेस मोदी को रोकने के लिए उन दलों से भी हाथ मिलाने को तैयार है जिनके साथ अतीत में उसे मुकाबला करना पड़ा था।

अगर कांग्रेस महागठबंधन को धरातल पर लाने की पहल करती है तो इस बात की पूरी संभावना है ​कि उसे दूसरे दलों की शर्तें माननी पड़ेंगी। संभवत: अपनी कुछ सीटें साथी दलों के लिए छोड़नी पड़ें। चर्चा है कि कांग्रेस महागठबंधन में प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित नहीं करना चाहती, क्योंकि राहुल प्रधानमंत्री बनने की आस लगाए बैठे हैं, अगर चुनावों से पहले ही उन्हें उम्मीदवार घोषित कर दिया तो मुख्य मुकाबला मोदी और राहुल के बीच हो जाएगा। ऐसी स्थिति में मोदी राहुल पर भारी पड़ सकते हैं। साथ ही महागठबंधन के साथियों का रूठ जाने का खतरा बरकरार है।

अब कांग्रेस ने अपनी रणनीति में दो बातों को खासतौर से शामिल किया है- मोदी को रोकने के लिए महागठबंधन करना और यदि कामयाबी मिली तो चुनावों बाद ही प्रधानमंत्री के चेहरे पर विचार करना यानी इस बार कांग्रेस की तैयारी मोदी को रोकने के लिए है। यह लक्ष्य हासिल करने के लिए वह ज्यादा से ज्यादा दलों को अपने पाले में करना चाहती है। कांग्रेस नेता भाजपा की सीटें कम करने के लिए गुणा-गणित में उलझे हैं।

इसके अलावा महागठबंधन के संभावित घटक दल ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर पर चुनाव कराना चाहते हैं। वहीं भाजपा का पूरा जोर देशभर में मोदी की सभाओं पर है। हाल में प्रधानमंत्री उत्तर प्रदेश के अलावा पश्चिम बंगाल में भी जनसभाएं कर लोगों को संबोधित कर चुके हैं।

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