vishnu puran katha and pravachan
vishnu puran katha and pravachan

तिरुपति/दक्षिण भारत। गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा न्यास शाखा दक्षिण भारत द्वारा तिरुमला तिरुपति धाम में आयोजित बालाजी चातुर्मास गोमंगल महोत्सव में पीवी मठ में चातुर्मासार्थ विराजित पथमेड़ा धाम के आदिसंस्थापक गोऋषि स्वामीश्री दत्तशरणानंदजी महाराज के सान्निध्य में जगतगुरु मलूकपीठाधीश्वर राजेंद्रदास देवाचार्यजी ने श्री विष्णु पुराण कथा के दूसरे दिन कथा का वर्णन करते हुए कहा कि स्कंद पुराण में भगवान वेंकटेश का विस्तार से वर्णन है।

सात योजन के क्षेत्रफल में फैला यह वेंकटाचल एक योजन ऊंचा है। यहां पर अनेकों तीर्थ स्थित हैं, जहां पर स्नान करने वाले व्यक्ति का जन्म-मरण का चक्कर समाप्त हो जाता है। कथावाचक ने कहा कि तीर्थों में स्नान करने से पुण्य बढ़ता है, अल्पायु दोष खत्म होता है, सामान्य प्राणी भी अगर इन तीर्थों की यात्रा करता है तो सूर्यलोक-चंद्रलोक को प्राप्त हो जाता है।

कथा वाचक ने कहा कि भगवान वेंकटेश के प्राकट्य में गौमाता की अद्भुत महिमा है। उन्होंने कथा सुनाते हुए कहा कि यहां के राजा के पास एक पदमा गाय थी, जिसके गोदुग्ध का राजा स्वयं सेवन करते थे। कुछ समय ऐसा हुआ कि गौमाता का दूध प्राप्त होना बंद हो गया। तो राजा ने ग्वाले को दंड देने की बात कही।

उसने बताया कि वह जब गाय चराने जाता है तो वह एक संत के पास बैठकर भगवत चर्चा करता है इसलिए उसे कुछ भी पता नहीं है। राजा साधु के पास गया तो उन्होंने बताया कि गाय भगवान जहां विराजमान हैं वहां दूध सिंचित कर देती है। वहीं भगवान तिरुपति बालाजी वेंकटेश की प्रतिमा स्थापित है। वहां पर आज का बालाजी मंदिर बना हुआ है।

उन्होंने भगवान वराह एवं तिरुपति तिरुमला धाम के संबंध एवं महत्व के बारे में विस्तार से बताते हुए गौसेवा रूपी सुगम साधन से भगवान बालाजी का मार्ग बताया। इस अवसर पर रामदास महाराज, सियावल्लभदास महाराज, महंत दिनेशगिरि महाराज फतेहपुर, भगवतगिरि महाराज समाख्याली, शांतिदासजी महाराज वीराना, आचार्य पुखराजजी द्विवेदी सांचौर, सीतारामदासजी, त्यागीजी महाराज, गोवत्स विट्ठलकृष्णजी महाराज, गंगादासजी महाराज वृंदावन, रविन्द्रानंद सरस्वती हरिद्वार, रघुनाथ भारतीजी महाराज सिणधरी, रामदासजी महाराज देवरी सहित सैक़डों संत गोपालक उपस्थित थे। कथा के मुख्य यजमान बेंगलूरु निवासी व ताराजी गु्रप के हरिशंकर, सुखराज प्रेमराज नरसाणा ने सपत्नीक व्यासपीठ का पूजन किया एवं आरती की। कार्यक्रम का संचालन आलोक सिंहल ने किया

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