मैसूरु/ दक्षिण भारतयहां की चामराज, कृष्णराज और नरसिंहराज विधानसभा सीटों पर भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशियों के चयन पर जिस प्रकार का असंतोष देखने को मिल रहा है, उसने तीनों सीटों के लिए १२ मई को होने वाले चुनाव को बेहद दिलचस्प बना दिया है। साफ नजर आने लगा है कि इन सीटों पर शायद ही किसी पार्टी के प्रत्याशी को आसानी से जीत हासिल हो सके। इन सीटों पर चुनाव ल़ड रहीं प्रमुख पार्टियों में असंतोष की सुगबुगाहट थमने का नाम नहीं ले रही है। कांग्रेस और भाजपा नेतृत्व ने इन स्थानों पर अपने प्रत्यााशी तय करने में स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं की राय से अधिक अपनी समझ से बनाई गई रणनीति को तवज्जो दी है।मुस्लिम मतदाताओं की बहुलता वाली नरसिंहराज सीट पर कांग्रेस के कद्दावर नेता तनवीर सेठ ने चार बार चुनाव जीते थे और उनसे पहले उनके पिता अजीज सेठ ने भी इस सीट पर छह बार चुनाव जीतकर अपना दबदबा कायम किया था। वहीं, इस बार यहां तनवीर सेठ के खिलाफ जोरदार सत्ता विरोधी लहर देखने को मिल रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान उन्होंने इस सीट के विकास की अनदेखी की। वहीं, सोशलिस्ट डेमोक्रैटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के प्रत्याशी अब्दुल मजीद और जनता दल (एस) के प्रत्याशी अब्दुल्ला ने भी उनका सिरदर्द ब़ढा रखा है। एसडीपीआई के अब्दुल मजीद ने वर्ष २०१३ के विधानसभा चुनाव में तनवीर सेठ को नरसिंहराज सीट पर काफी करीबी टक्कर दी थी। वहीं, जनता दल (एस) ने अपने पुराने वफादार और मैसूरु के पूर्व महापौर रहे संदेश स्वामी के स्थान पर अब्दुल्ला को अपना प्रत्याशी बनाकर असंतोष की चिनगारी को फूंक मार दी है। इन तीनों मुस्लिम प्रत्याशियों की वजह से नरसिंहराज सीट में अल्पसंख्या वोटबैंक में तीन फा़ड होने की संभावना नजर आने लगी है, जो भाजपा के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। माना जा रहा है कि अगर भाजपा को यहां सफलता न भी मिले, तब भी प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों कांग्रेस और जनता दल (एस) के प्रत्याशियों की जीत आसान नहीं होने वाली है। जमीनी तथ्यों की बात करें तो वर्ष १९९४ में भी इस सीट पर ऐसे ही हालात उपजे थे। उस वर्ष के चुनाव में यहां भाजपा प्रत्याशी मारुतिराव पवार ने बाजी मार ली थी। नरसिंहराज की प़डोसी सीट कृष्णराज में भाजपा ने पूर्व मंत्री एसए रामदास को अपना प्रत्याशी बनाया है। इससे भी पार्टी कार्यकर्ताओं के एक खेमे में असंतोष हिलोरें मार रहा है। अपने सामाजिक काम-काज से पूरे इलाके में अलग पहचान बना चुके एचवी राजीव को उम्मीद थी कि पार्टी नेतृत्व इस चुनाव में कृष्णराज सीट पर उनको ही अपना चेहरा बनाएगी। यह उम्मीद पूरी न होने के बाद उन्होंने भी बगावती रुख अपना लिया। माना जा रहा है कि राजीव का यह असंतोष कृष्णराज सीट पर मौजूद बहुसंख्यक ब्राह्मण मतदाताओं को भाजपा के खेमे से दूर कर सकता है, जिन्हें इस सीट पर पारंपरिक रूप से भाजपा समर्थक माना जाता है। वैसे, भाजपा द्वारा रामदास को अपना प्रत्याशी बनाया जाना इसलिए भी चौंकाता है क्योंकि वर्ष २०१३ के विधानसभा चुनाव में वह अपने कांग्रेसी प्रतिद्वंद्वी एमके सोमशेखर से ६ हजार वोटों से परास्त हो गए थे। उस वर्ष एचवी राजीव ने बीएस येड्डीयुरप्पा की अगुवाई वाली कर्नाटक जनता पक्ष (केजेपी) के टिकट पर चुनाव ल़डकर कांग्रेस को फायदा पहुंचाया था। कुछ स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि हो सकता है कि इस चुनाव में राजीव की जीत की संभावना पार्टी को कमतर नजर आई हो लेकिन वह पिछले चुनाव की ही तरह इस बार भी भाजपा के वोटबैंक में सेंध लगाकर इसके प्रत्याशी को नुकसान जरूर पहुंचा सकते हैं। जहां तक चामराज सीट की बात है तो यहां से जनता दल (एस) ने यहां के मजबूत वोक्कलिगा वोट बैंक को देखते हुए मैसूरु विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति केएस रंगप्पा को अपना प्रत्याशी बनाया है, जबकि भाजपा ने मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष एल नागेंद्र को और कांग्रेस ने मौजूदा विधायक वासु को अपना चेहरा बनाया है। वहीं, जनता दल (एस) का टिकट न मिलने से नाराज चल रहे हरीश गौ़डा ने इस पार्टी के लिए असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। उन्हें रंगप्पा को प्रत्याशी बनाए जाने पर सख्त आपत्ति है, जबकि इस सीट पर उच्च शिक्षित मतदाताओं की बहुलता है। रंगप्पा अपनी अकादमिक पृष्ठभूममि के नाम पर इन प़ढे-लिखे मतदाताओं का समर्थन मांग रहे हैं। गौरतलब है कि चामराज सीट पर वोक्कलिगा समुदाय के मतदाता बहुसंख्यक होने के बावजूद इसी समुदाय की पार्टी के रूप में पहचाने जानेवाले जनता दल (एस) को यहां से कभी चुनावी जीत हासिल नहीं हुई। वर्ष १९९४ से २००८ तक इसे भाजपा का ग़ढ माना जाता रहा लेकिन यह पूर्व विधायक एचएस शंकरलिंगे गौ़डा का व्यक्तिगत करिश्मा था। उन्होंने स्थानीय निवासियों के साथ बेहद गर्मजोशी भरे रिश्ते विकसित किए थे। वर्ष २०१३ का चुनाव उन्होंने जनता दल (एस) प्रत्याशी के रूप में ल़डा था। वह चुनाव हार गए थे लेकिन भाजपा भी इस सीट पर पहले से तीसरे स्थान पर लु़ढक गई थी।

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