नई दिल्ली/भाषा। दिल्ली पुलिस के एक कर्मी द्वारा एक मृत मोर को तिरंगे में लपेटकर दफनाए जाने की घटना ने ‘प्रोटोकोल’’ और राष्ट्रीय पक्षी की सुरक्षा से जु़डे कई सवाल ख़डे कर दिए हैं। वन्यजीव के मुद्दों पर काम करने वाले लोगों का कहना है कि इस मामले में ‘प्रोटोकोल’’ का उल्लंघन किया गया। उन्होंने कहा कि मोर को सही ढंग से दफनाने की प्रक्रिया में वन विभाग को आगे ब़ढकर सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए थी। पुलिस को शुक्रवार को उच्च न्यायालय के परिसर के बाहर एक मोर के घायल अवस्था में होने की सूचना मिली थी। तिलक मार्ग पुलिस थाने के एक अधिकारी ने बताया, सहायक उपनिरीक्षक ने पंछी को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया। वह उसे चांदनी चौक के एक अस्पताल में ले गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। पक्षी को फिर दक्षिणी दिल्ली के जौनापुर ले जाकर उसका पोस्टमार्टम कराया गया। पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस कर्मी नई दिल्ली नगरपालिका परिषद् (एनडीएमसी) के अधिकारियों के संपर्क में था ताकि वह राष्ट्रीय पक्षी से जु़डी किसी प्रक्रिया का उल्लंघन न कर बैठे। अधिकारी ने बताया कि पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक और एनडीएमसी अधिकारियों ने मोर को तिरंगे में लपेटकर दफनाने का सुझाव दिया। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि पक्षी के शव को उचित ढंग से दफनाया गया है और पुलिस कर्मी के खिलाफ कोई कार्रवाई करने की जरूरत नहीं है। हालांकि वन्यजीव कार्यकर्ताओं ने पूरी प्रक्रिया की आलोचना की और कहा कि जानवरों का अंतिम संस्कार वन विभाग के अधिकारियों के सामने होना चाहिए और पोस्टमार्टम की तस्वीर ली जानी और वीडियो बनाई जानी चाहिए थी।

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