नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने मंगलवार को कहा कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) को बदलते समय के साथ उभरते मुद्दों को भी शामिल करना चाहिए, तभी वह अपनी तर्कसंगत छवि कायम रख पाएगा। उन्होंने कहा कि भारत कुछ सप्ताह में मिनी (छोटे पैमाने की )मंत्रिस्तरीय बैठक का आयोजन कर रहा है, जिससे इस उद्देश्य को हासिल किया जा सके। पिछले सप्ताह ११वीं डब्ल्यूटीओ वार्ता ब्यूनस आयर्स में टूट गई थी और इसमें किसी तरह की मंत्रिस्तरीय घोषणा या कोई उल्लेखनीय नतीजा हासिल नहीं हुआ। इस बैठक में अमेरिका सार्वजनिक खाद्य भंडारण के मुद्दे पर स्थाई समाधान की प्रतिबद्धता से पीछे हट गया। इससे भारत और अन्य विकासशील देशों को निराशा हुई।प्रभु ने कहा, भारत में अगले कुछ सप्ताह में एक प्रमुख बैठक आयोजित करने जा रहा है जिसमें उसका इरादा दुनिया के प्रमुख देशों को लाने का है। हमें इसे डब्ल्यूटीओ की छोटी मंत्रिस्तरीय बैठक कह रहे हैं। इससे पहले प्रभु ने कहा था कि भारत फरवरी में डब्ल्यूटीओ के कुछ सदस्यों की बैठक आयोजित करेगा जिसमें खाद्य सुरक्षा और अन्य मुद्दों पर समर्थन जुटाने का प्रयास किया जाएगा। विकसित देश अपास में ऐसा समूह बना रहे हैं ताकि वे निवेश सुगमता, ई-कामर्स के नियम, स्त्री पुरुष समानता और मत्स्यपालन के लिए सब्सिडी में कमी जैसे मुद्दों को वार्ता में शामिल किए जाने का आधार तैयार करा सकें। यहां एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रभु ने कहा कि छोटी मंत्रिस्तरीय बैठक के आयोजन के पीछे विचार यह है कि डब्ल्यूटीओ भी आज दुनिया के कुछ तर्कसंगत मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करे।

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