बढती आधुनिकता की भाग-दौ़ड में तनावपूर्ण जीवन जीने वाले विश्व के ६० लाख लोगों में से ४५ लाख लोग तनाव की चपेट में आने के कारण प्रतिवर्ष आत्महत्या कर लेते हैं, इसमें विकासशील देशों के तनावग्रस्त २० लाख लोग भी शामिल हैं। मध्यप्रदेश के उज्जैन के वरिष्ठ मनोचिकित्सक एवं पिछले कई वर्षों से शोध कर देश के विभिन्न मेडिकल महाविद्यालयों में अपने शोधपत्र प्रस्तुत करने वाले डॉ. नरेश पुरोहित ने अपनी शोध रिपोर्ट में उक्त जानकारी देते हुए बताया कि विश्व में लोगों की दिनोंदिन बढती भाग-दौ़ड की जीवन शैली में तनाव धीरे-धीरे आम समस्या बनकर उभर रही है और युवा से लेकर बुजुर्ग मानसिक समस्या की गिरफ्त में आ रहे हैं। विश्व में प्रतिवर्ष ६० लाख लोग तनाव की चपेट में आते हैं, इनमें से २० लाख लोग विकासशील देशों के होते हैं तथा ४५ लाख तनाव के कारण अपनी जीवन लीला समाप्त कर लेते हैं।वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन की हाल ही में जारी हुई ताजा रिपोर्ट में चिन्ता व्यक्त करते हुए बताया गया है कि तनावग्रस्त लोगों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है और तनाव का स्तर इतना ज्यादा है कि यह हृदयरोग , मधुमेह , उच्च रक्तचाप, मोटापा एवं कैंसर इत्यादि रोगों का कारण बना हुआ है। राष्ट्रीय सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के सलाहकार डॉ. पुरोहित ने ‘तनाव की बढती चुनौतियों‘ शीर्षक से तैयार की गई अपने शोध रिपोर्ट में भारत के दस प्रतिशत लोग तनावग्रस्त रहने की जानकारी देते हुए बताया कि आमलोगों में चिन्ता, घबराहट, व्याकुलता, उलझन से इन सब के मिलने से तनाव पैदा होता है। इसके अलावा जैविक व मनोवैैज्ञानिक कारण भी तनाव के लिए जिम्मेदार है।डॉ. पुरोहित ने तनावग्रस्त होने का कारण बताते हुए अपनी रिपोर्ट में बताया कि वर्तमान में बदलते परिवेश में दायित्वों का बढता बोझ, कैरियर की चिन्ता, आर्थिक महत्वकांक्षा, व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा के चलते युवकों से लेकर बुजुर्गों तक में तनाव के लक्षण सामान्यत: देखे जा सकते हैं। घरेलू महिलाओं में विशेषत: यह रोग पुरुषों के मुकाबले दो गुना अधिक होता है।राजस्थान के अजमेर में जवाहर लाल नेहरु चिकित्सा महाविद्यालय में ‘मानसिक स्वास्थ्य‘ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में उक्त रिपोर्ट पेश करते हुए कहा, जिस तरह से शराब मानव तंत्रिकाओं को प्रभावित करती हैं एवं हम उसके आदि हो जाते हैं, ठीक उसी तरह तनाव हमारी तंत्रिकाओं को इस तरह से प्रभावित करता है कि हमें उसकी आदत हो जाती है। लेकिन धीरे-धीरे यह तनाव हमारे जीवन एवं स्वास्थ्य को प्रभावित करने लगता है।उन्होंने आधुनिक जमाने में चल रही गलाकाट प्रतियोगिता से तनावग्रस्त से मुक्ति पाने के उपाय बताते हुए कहा कि ज्यादा से ज्यादा विश्राम करें, प्रतिदिन व्यायाम और आसन करें, कम सोचें और अपनी जीवन शैली में परिवर्तन करें।

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