capital punishment
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झुंझुनूं। तीन साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म का दोषी पाए गए एक शख्स को यहां विशेष न्यायालय ने फांसी की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने दोषी विनोद बंजारा के गुनाह को अक्षम्य मानते हुए उसके लिए सजा-ए-मौत का ऐलान किया। इस मामले में गुनहगार पर पांच हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। न्यायालय ने मामले को दुर्लभतम माना और फांसी की सजा सुना दी। यह झुंझुनूं में पोक्सो एक्ट के अंतर्गत फांसी की सजा का पहला मामला है, जिसका पुलिस ने 11 दिन में ही चालान पेश कर दिया था।

न्यायाधीश नीरजा दाधीच ने फैसला सुनाने के साथ ही एक मार्मिक कविता भी सुनाई जो आज सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। न्यायालय ने अलीपुरा लालसोट के निवासी विनोद को दुष्कर्म का दोषी पाया है। उसने 2 अगस्त को मलसीसर के पास डाबड़ी धीर सिंह में एक मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म किया था। बच्ची के दिल में छेद भी है। जब यह फैसला आया तो वह इलाज के लिए जयपुर थी। उसकी मां और नाना उसके साथ थे।

दुष्कर्म का दोषी विनोद फैसला सुनते वक्त चुपचाप खड़ा रहा। उसने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की। वहीं यह भी मालूम हुआ ​है कि विनोद की पत्नी ने बीस दिन पहले ही एक बच्ची को जन्म दिया है। इस मामले में पुलिस ने सक्रियता से अपनी भूमिका निभाई और आरोपी को कानून के कठघरे में खड़ा कर दिया, जहां से उसे मृत्युदंड मिला।

विनोद बंजारा फेरी लगाकर बर्तन बेचा करता ​था। यह बच्ची अपने ननिहाल आई हुई थी। जब वह घर के बाहर खेल रही थी तो विनोद ने उसके साथ घिनौती हरकत की। वह भागने लगा तो बच्ची की नानी ने देख लिया। उसके बाद परिवार थाने पहुंचा और मामला दर्ज कराया। आखिरकार विनोद को चिड़ावा से गिरफ्तार कर लिया गया।

न्यायाधीश नीरजा दाधीच ने दोषी को मृत्युदंड सुनाते समय यह कविता भी सुनाई:

वह मासूम नाज़ुक आंगन की कली थी
मां-बाप की आंख का तारा थी अरमानों से बनी थी
जिसकी मासूम अदाओं से मां-बाप का दिल बन जाता था

कुछ छोटी सी बच्ची थी ढ़ंग से बोल नहीं पाती थी
दिखाकर जिसकी मासूमियत उदासी बन जाती थी

जिसने जीवन के केवल तीन बसंत ही देखे थे
उससे यह हुआ अन्याय कैसे विधि के लेखे थे

एक 3 साल की बेटी पर यह कैसा अत्याचार हुआ
एक बच्ची को दंगों से बचा नहीं सके
ऐसा मुल्क लाचार हुआ

उस बच्ची पर जुल्म हुआ वह कितना रोई होगी
मेरा कलेजा फट गया तो मां कैसे सोई होगी

इस मासूम को देख मन में प्यार भर जाता है
देख उसी को मन में कुछ हैवान उतर आता है

कपड़ों के कारण होते हैं रेप, कहे उन्हें कैसे बतलाऊं मैं
आज 3 साल की बच्ची को साड़ी कैसे पहनाऊं मैं

अगर अब भी न सुधर सके तो एक दिन ऐसा आएगा
इस देश को बेटी देने में भगवान भी घबराएगा।

न्यायाधीश ने कहा कि ऐसे कृत्य कर सजा पाने वाले लोगों को समाज में सुधार का कोई हक नहीं मिलना चाहिए।

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1 COMMENT

  1. नमस्ते। न्यायालय का फैसला भगवान् का फैसला है। भगवान् के घर देर हो सकता है, लेकिन अंधेर नहीं। कविता के माध्यम से दिया गया भाव, काव्य जगत के लिए भी प्रतिष्ठा की बात है। धन्यवाद।

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